शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी जनपद पंचायत में आयोजित एक 'मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर' के दौरान उस वक्त सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया जब भारतीय जनता पार्टी के ही एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ने मंच से जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए। भाजपा के जिला पंचायत सदस्य दुर्गेश तिवारी ने खुले मंच से अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए पिछले शिविरों में जनता द्वारा दिए गए आवेदनों और उनके निराकरण का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की दो टूक मांग कर दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मंच से अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल
जनता के बीच मुखर अंदाज में बोलते हुए जिला पंचायत सदस्य दुर्गेश तिवारी ने प्रशासनिक अधिकारियों को घेरते हुए कहा कि ठीक इसके करीब 15 दिन पहले भी इसी प्रकार का एक शिविर आयोजित किया गया था। उस दौरान क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण अपनी बुनियादी और गंभीर समस्याएं लेकर पहुंचे थे और अधिकारियों को अपने लिखित आवेदन सौंपे थे। अब एक बार फिर से नया शिविर आयोजित कर दिया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बात का कोई रिकॉर्ड या स्पष्टीकरण नहीं है कि पिछले शिविर में प्राप्त हुए कुल कितने आवेदनों का जमीनी स्तर पर निराकरण किया गया है। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल खानापूर्ति के लिए बार-बार जनसमस्या निवारण शिविर लगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला है, बल्कि इन आयोजनों का वास्तविक और सकारात्मक लाभ आम जनता तक पहुंचना भी चाहिए।
ग्रामीणों की उम्मीदों और लंबित मामलों की समीक्षा की मांग
दुर्गेश तिवारी ने कड़े शब्दों में कहा कि ग्रामीण अपनी तमाम उम्मीदों का दामन थामकर इन जनविश्वास शिविरों तक पहुंचते हैं। उन्हें शासन-प्रशासन पर यह अटूट भरोसा होता है कि इन मंचों पर अधिकारी उनकी फरियाद सुनेंगे और उसका त्वरित समाधान निकालेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुराने आवेदनों पर समयबद्ध तरीके से कोई ठोस कार्रवाई ही नहीं हुई है, तो नए आवेदन स्वीकार करने से पहले पूर्व के मामलों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन पुराने सभी लंबित आवेदनों के निराकरण की स्थिति को तुरंत सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि जनता के मामलों का तय समय सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से निपटारा किया जाए। बीजेपी नेता द्वारा खुद अपनी ही सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों को इस तरह सार्वजनिक मंच से घेरने का यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।


