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    कृषि विवि जोधपुर : पश्चिमी राजस्थान की पहली अत्याधुनिक प्लांट टिश्यू कल्चर लैब का हुआ भव्य उद्घाटन

    गुणवत्ता युक्त पौध सामग्री व कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी लैब: कुलगुरु प्रो. जैतावत

    लैब के माध्यम से औषधीय पौधों के उत्पादन को मिलेगी नई दिशा- कुलगुरु प्रो. शुक्ल

    ​जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर में पश्चिमी राजस्थान की पहली अत्याधुनिक प्लांट टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला के उद्घाटन समारोह का आयोजन हुआ। प्रयोगशाला का विधिवत उद्घाटन कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत एवं डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने किया।

    ​इस अवसर पर कुलगुरु प्रोफेसर जैतावत ने बतौर अध्यक्ष संबोधित करते हुए कहा कि, यह अत्याधुनिक टिश्यू कल्चर लैब पश्चिमी राजस्थान के कृषि परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इस तकनीक के माध्यम से हम किसानों को कम समय में उच्च गुणवत्ता युक्त, रोगमुक्त और जलवायु-सहिष्णु पौध सामग्री उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। विश्वविद्यालय का निरंतर प्रयास है कि आधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक ही सीमित न रहकर सीधे धरातल पर किसानों के खेतों तक पहुंचे, जिससे उनकी आय में वृद्धि और क्षेत्रीय बागवानी को नई गति मिल सके।

    समारोह के मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के औषधीय पौधों की देश व विदेश में बड़ी मांग है, ऐसे में औषधीय पौधों के उत्पादन को भी इस लैब के माध्यम से नई दिशा मिलेगी।  उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक लैब शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्र में कृषि अनुसंधान, फसल सुधार और गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

    इस मौके पर निदेशक अनुसंधान डॉ एम एम सुंदरिया ने कहा कि इस लैब के माध्यम से कृषि विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किए गए गुणवत्तायुक्त पौधों को देश भर में सप्लाई किया जाएगा, इस से प्रदेश व विश्वविद्यालय की साख में भी बढ़ोतरी होगी।

    फसलों का होगा सूक्ष्म प्रवर्धन

    ​समारोह के दौरान लैब के नोडल अधिकारी व वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. प्रदीप पगारिया ने अतिथियों को लैब की तकनीकी विशेषताओं एवं कार्यप्रणाली से अवगत करवाते हुए भ्रमण करवाया।

    उन्होंने बताया कि इस लैब के जरिए अनार, अंजीर , कैक्टस सहित अन्य बागवानी फसलों, औषधीय पौधों सहित क्षेत्र की प्रमुख फसलों का क्लोनल प्रोपेगेशन (सूक्ष्म प्रवर्धन) किया जाएगा, जिससे किसानों को प्रमाणित और उन्नत किस्मों की गुणवत्ता युक्त पौध आसानी से मिल सकेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय में लैब की विकास यात्रा को भी प्रस्तुत किया।

    पुस्तिका विमोचन

    समारोह के दौरान पादप उत्तक संवर्धन से संबंधित पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। समारोह में आभार प्रयोगशाला की प्रधान अन्वेषक डॉ सुप्रिया ने जताया। कार्यक्रम में मंच संचालन सह प्रधान अन्वेषक, डॉ कृष्णा सहारण ने किया। इस दौरान प्रयोगशाला के सह प्रधान अन्वेषक डॉ राहुल भारद्वाज भी मौजूद रहे।

    समारोह के दौरान वित्त नियंत्रक व लिंक ऑफिसर (कुल सचिव) मेवाराम बालन व विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक व शोधार्थी मौजूद रहे।

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