लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर और उसके सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। खासकर निषाद पार्टी के तेवरों और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) में जारी बगावत ने एनडीए की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके अलावा गोरखपुर में भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का खुला समर्थन किए जाने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं। इन सभी असहज करने वाले घटनाक्रमों के बीच अब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के आगामी तीस अक्टूबर को संभावित लखनऊ दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है।
सहयोगी दलों की नाराजगी और दबाव की राजनीति
चुनाव नजदीक आते ही एनडीए के कुछ सहयोगी दल दबाव की रणनीति अपनाते नजर आ रहे हैं। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने दिल्ली की एक रैली में अलग राह चुनने की चेतावनी तक दे डाली है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी सुभासपा के असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में कर ओमप्रकाश राजभर की राजनीतिक जमीन कमजोर करने की जुगत में लगी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव में भले ही कुछ महीनों का वक्त शेष है, लेकिन छोटे दलों की यह नाराजगी सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
डैमेज कंट्रोल और अमित शाह का आगामी दौरा
पार्टी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अमित शाह के आगामी राजधानी दौरे के दौरान एनडीए के सभी घटक दलों के साथ उच्चस्तरीय समन्वय बैठक होने की संभावना है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सहयोगी दलों की शिकायतों को दूर करना और उन्हें छिटकने से रोकना होगा। इसके अलावा, हालिया एमएलसी और अन्य चुनावों में टिकट वितरण के चलते पार्टी के भीतर उठे असंतोष के सुरों को थामने के लिए भी रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। भाजपा विरोधी दलों के संभावित गठजोड़ और स्थानीय नेताओं की नाराजगी से निपटने के लिए पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है।


