पुणे। भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने युवा पीढ़ी (जेन जी) द्वारा सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक मुद्दों को लेकर दिए जा रहे बयानों पर अपनी राय साझा की है। उन्होंने कहा कि किसी के सोचने का तरीका अलग होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वे गलत हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रशासनिक तंत्र और समाज को निरंतर बातचीत के माध्यम से युवाओं के दृष्टिकोण, उनकी शिकायतों और समस्याओं को गहराई से समझने का सार्थक प्रयास करना चाहिए।
युवाओं के सोचने का नज़रिया अलग लेकिन गलत नहीं
जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया कि हर पीढ़ी का चीज़ों को देखने और समझने का एक अपना नज़रिया होता है, जो पुरानी पीढ़ी की सोच से अलग हो सकता है। उन्होंने कहा कि युवा देश का अहित नहीं चाहते और वे जो भी कदम उठाते हैं, वह बेहतरी की भावना से ही उठाते हैं। इसलिए उनकी ऊर्जा और सोच को दबाने या खारिज करने के बजाय यह समझने की ज़रूरत है कि उन्हें क्या बात प्रेरित कर रही है, ताकि उस ऊर्जा का देशहित में सही दिशा में इस्तेमाल किया जा सके।
संवाद और एक-दूसरे को सुनना है बेहद ज़रूरी
पूर्व सेना प्रमुख ने आपसी बातचीत और एक-दूसरे की बात सुनने को समस्याओं का हल बताया। उन्होंने कहा कि जब तक शासन और समाज युवाओं की कठिनाइयों को समझेंगे नहीं, तब तक उनकी उलझनों का समाधान संभव नहीं है। इसलिए दोनों पक्षों के बीच संवाद का बना रहना अत्यंत आवश्यक है।
चुनाव आयोग और राजनीतिक बयानबाज़ी से जुड़ा विवाद
यह पूरा मामला ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य राजनीतिक घटकों के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और पारदर्शी चुनाव की मांग कर रहे हैं। इस विवाद पर केंद्रीय मंत्रियों द्वारा इसे 'अराजकता' फैलाने का प्रयास बताए जाने और विपक्षी नेताओं द्वारा इसे संवैधानिक अधिकारों व निष्पक्ष चुनाव की मांग कहे जाने के बीच जनरल नरवणे ने राजनीतिक नैरेटिव से इतर युवाओं के साथ संवाद कायम करने की वकालत की है।


