आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को रिकॉर्ड के नाम पर सेवा से हटाने की कथित चेतावनियां, 32 साल से सेवाएं दे रहीं महिलाओं की परेशानी बढ़ी
कुम्हेर। कुम्हेर बाल विकास परियोजना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के सामने कई तरह की समस्याएं खड़ी होने का मामला सामने आया है। स्वयंसेवी संस्था से परियोजना का संचालन हटने के बाद कार्मिकों का कई माह का मानदेय लंबित होने और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के नाम पर सेवा से हटाने की कथित धमकियां मिलने के आरोप लगाए गए हैं। इससे लंबे समय से विभागीय योजनाओं में सेवाएं दे रहीं महिला कार्मिकों की चिंता बढ़ गई है। मामले ने परियोजना के संचालन और कार्मिकों की सेवा संबंधी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभागीय पोर्टल पर रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद दोबारा मांगे जा रहे दस्तावेज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परियोजना क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से संबंधित कई आवश्यक जानकारियां राजपोषण, पोषण ट्रैकर, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना सहित विभिन्न विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कार्मिकों से दोबारा दस्तावेज और अन्य जानकारियां मांगे जाने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कार्मिकों का कहना है कि रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के दौरान उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में सेवा से हटाने की चेतावनियां भी दी जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग के अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
32 वर्षों से सेवाएं दे रहीं कार्यकर्ताओं की बढ़ी चिंता
परियोजना क्षेत्र में कई महिला कार्मिक लंबे समय से विभागीय सेवाएं दे रही हैं। इनमें कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं ऐसी भी हैं, जो लगभग 32 वर्षों से अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। लंबे समय बीतने के कारण कुछ कार्मिकों के पास पुराने शैक्षणिक दस्तावेज अथवा नियुक्ति पत्र उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है।
ऐसे में पुराने दस्तावेज दोबारा प्रस्तुत करने की मांग और सेवा से हटाए जाने की कथित चेतावनियों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महिला कार्मिकों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद उनकी समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता और नियमानुसार किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
कई माह से मानदेय लंबित, आर्थिक संकट की आशंका
परियोजना के कार्मिकों का कई माह से मानदेय नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। मानदेय लंबित रहने से उन महिला कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, जो सीमित आय में अपने परिवार की जरूरतें पूरी करती हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, पोषण सेवाओं तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में समय पर मानदेय भुगतान और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उपनिदेशक की कार्यशैली पर उठे सवाल
परियोजना से जुड़े सूत्रों ने महिला एवं बाल विकास विभाग, डीग की उपनिदेशक की कार्यशैली और प्रशासनिक हस्तक्षेप को मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, रिकॉर्ड की मांग, मानदेय भुगतान में देरी और सेवा से हटाने की कथित चेतावनियों को लेकर कार्मिक परेशान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित उपनिदेशक का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी ने बताया अनुचित
कुम्हेर के बाल विकास परियोजना अधिकारी महेंद्र अवस्थी ने कहा कि परियोजना क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से संबंधित रिकॉर्ड विभिन्न विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध है। इसके बावजूद बार-बार रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए कार्मिकों को परेशान करना, मानदेय का भुगतान लंबित रखना और सेवा से हटाने की धमकियां देना उचित नहीं है।
अवस्थी के अनुसार, वर्षों से विभागीय योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली मानदेयकर्मियों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई कार्मिक लगभग 32 वर्षों से सेवाएं दे रही हैं। ऐसे में अनावश्यक दबाव बनाने के बजाय लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने सेवा संबंधी मामलों में नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने पर भी जोर दिया, ताकि लंबे समय से कार्यरत महिला कार्मिकों को राहत मिल सके।
मानदेय भुगतान और सेवा संबंधी मामलों के समाधान की मांग
कुम्हेर बाल विकास परियोजना से जुड़े इस मामले में कार्मिकों की प्रमुख मांग लंबित मानदेय का भुगतान, रिकॉर्ड संबंधी प्रक्रिया में स्पष्टता और सेवा से जुड़े मामलों का नियमानुसार निस्तारण है। अब देखना होगा कि विभाग इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और कार्मिकों को कब तक राहत मिलती है।
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