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    MP में गर्भवती महिलाओं को आयुर्वेदिक उपचार देने की तैयारी, AI से आकलन होगा वात-पित्त-कफ का

    भोपाल। प्रदेश में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से लोगों के वात, पित्त और कफ की स्थिति का आकलन कर संभावित बीमारियों का समय पर पता लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राज्यभर में 'आयुष से आरोग्य' अभियान की शुरुआत होगी। अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच के बाद नागरिकों को उनकी शारीरिक प्रकृति के अनुरूप आयुष औषधियां, आहार और जीवनशैली में सुधार संबंधी परामर्श दिया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारियों की रोकथाम, शुरुआती चरण में पहचान और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को विस्तार देना है। आयुष विभाग इस योजना को पंचायत, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त समन्वय से लागू करने जा रहा है।

    केरल और तमिलनाडु मॉडल की तर्ज पर बनी कार्ययोजना

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद अधिकारियों के एक अध्ययन दल ने केरल और तमिलनाडु में संचालित आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया था। दल की रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप नई कार्ययोजना तैयार की गई है। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के अनुसार, इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत पंचायत स्तर तक योग और आयुष परामर्श की सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी।

    गर्भवती महिलाओं को मिलेगी विशेष आयुष किट

    अभियान का प्राथमिक फोकस मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना तथा सामान्य प्रसव को बढ़ावा देना है। इसके तहत स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव पूर्व जांच (ANC) के लिए आने वाली पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को विशेष आयुष किट उपलब्ध कराई जाएगी। इस किट में गर्भावस्था के दौरान जरूरी पोषण और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने वाली औषधियां शामिल रहेंगी।

    हर गांव में योगाभ्यास और कुपोषण पर प्रहार

    योजना के विस्तार के रूप में प्रत्येक गांव में नियमित योगाभ्यास कराने की व्यवस्था की जाएगी, जिसके लिए ग्राम पंचायतें स्थान उपलब्ध कराएंगी। आयुष वेलनेस सेंटरों के तर्ज पर गांवों में योग प्रशिक्षक तैनात किए जाएंगे, जो ग्रामीणों को मौसमी खानपान और स्वस्थ दिनचर्या की जानकारी देंगे। इसके साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से चिन्हित बच्चों तक आयुष औषधियां पहुंचाकर कुपोषण दूर करने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया जाएगा।

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