जन लेखा समिति की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए दिए महत्वपूर्ण सुझाव
त्रिवेंद्रम / जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केरल के त्रिवेंद्रम में आयोजित भारत की संसद एवं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की जन लेखा समितियों के अध्यक्षों के दो दिवसीय सम्मेलन में मंगलवार को अपने उद्बोधन के दौरान जन लेखा समिति की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, जवाबदेह एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
अपने अनुभवों के आधार पर जूली ने कहा कि वर्तमान में समिति का ध्यान मुख्यतः वित्तीय अनियमितताओं के ऑडिट के बाद परीक्षण पर अधिक रहता है। समिति के कार्यक्षेत्र को केवल वित्तीय आंकड़ों तक सीमित न रखते हुए परफॉर्मेंस ऑडिट तथा वैल्यू फॉर मनी के मूल्यांकन पर भी केंद्रित किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी व्यय की प्रभावशीलता और जनहित में उसके वास्तविक परिणामों का आकलन किया जा सके।
समिति की नियमित बैठकें एवं कैग रिपोर्टों के बैकलॉग का समयबद्ध निस्तारण
जूली ने सुझाव दिया कि जन लेखा समिति की बैठकें पूरे वर्ष नियमित रूप से निर्धारित अंतराल पर आयोजित करना अनिवार्य किया जाए। एक माह में कम से कम चार विभागों का परीक्षण किया जाना चाहिए, जिससे नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों के लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि समिति की नियमित कार्यप्रणाली और निर्धारित समय-सीमा में परीक्षण से विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।
पीपीपी मॉडल एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं के व्यय की जांच
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल , स्वायत्तशासी संस्थाओं तथा स्पेशल पर्पस वेहिकल के माध्यम से किए जाने वाले बड़े व्यय को भी जन लेखा समिति की नियमित जांच के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए। सार्वजनिक धन के उपयोग से संबंधित सभी प्रमुख व्ययों की समीक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनी रहे।
विभागीय जवाबदेही एवं एटीआर की प्रभावी समीक्षा
उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा समिति के प्रश्नों के जवाब देने तथा समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन के संबंध में जवाबदेही तय करने की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाना चाहिए। यदि कोई विभाग वांछित क्रियान्वयन संबंधी सूचना निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए। इसी प्रकार, यदि विभाग द्वारा समिति के प्रश्न का पूर्ण उत्तर नहीं दिया जाता है, तो उसे अपूर्ण जवाब मानते हुए पुनः जवाब मांगा जाना चाहिए। इससे केवल औपचारिक रूप से जवाब भेजकर विषय को समाप्त करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
उन्होंने कहा कि समिति की सिफारिशों के बाद विभागों से कार्रवाई प्रतिवेदन प्राप्त किए जाते हैं। एटीआर की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए केवल रिपोर्ट प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें की गई कार्रवाई की वास्तविक स्थिति की भी समीक्षा की जानी चाहिए। एटीआर में की गई कार्रवाई, वर्तमान स्थिति, शेष कार्रवाई तथा उसे पूरा करने की संभावित समय-सीमा स्पष्ट रूप से अंकित कराई जानी चाहिए, ताकि समिति की सिफारिशों का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
नियमों में सुधार एवं अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर
जूली ने सुझाव दिया कि जहां किसी वित्तीय अनियमितता का कारण नियमों की अस्पष्टता अथवा प्रक्रिया में कमी हो, वहां समिति केवल संबंधित अधिकारी से जवाब मांगकर न रुके, बल्कि वित्त विभाग को संबंधित नियमों अथवा प्रक्रियाओं में आवश्यक संशोधन की अनुशंसा भी करे। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अनुशंसित संशोधन अधिसूचित हुआ है अथवा नहीं। इससे नियमों एवं प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार संभव होगा तथा एक विभाग में हुई अनियमितता की पुनरावृत्ति अन्य विभागों में भी रोकी जा सकेगी।
सम्मेलन में जन लेखा समितियों की कार्यप्रणाली, उनकी प्रभावशीलता, विभागीय जवाबदेही तथा सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने से संबंधित विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
जूली द्वारा प्रस्तुत सुझावों का उद्देश्य जन लेखा समिति को केवल वित्तीय अनियमितताओं की समीक्षा करने वाली संस्था तक सीमित न रखकर उसे सरकारी व्यय की गुणवत्ता, प्रभावशीलता एवं जनहित में उसके परिणामों का मूल्यांकन करने वाली अधिक सक्षम संस्था के रूप में विकसित करना है।
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