अलवर मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान की पहल पर 68 प्रतिभागियों ने की चर्चा, पंचायत बैठकों में महिला हिंसा के मुद्दे उठाने और किशोरी शिक्षा को बढ़ावा देने पर बनी सहमति
अलवर। महिलाओं के साथ होने वाली लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम और पंचायतों में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अलवर मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान की ओर से हितधारक सदस्यों की कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सरपंचों, वार्ड पंचों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित कुल 68 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में महिला अधिकार, पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी, घरेलू एवं सामाजिक हिंसा की रोकथाम और किशोरी बालिकाओं की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
संस्था सचिव नूर मोहम्मद ने कहा कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी जिस स्तर पर होनी चाहिए, वह अभी दिखाई नहीं देती। पंचायतों में 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व होने के बावजूद कई बार उनके विचारों और निर्णयों को उचित महत्व नहीं मिलता। उन्होंने सरपंचों, वार्ड पंचों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा उन्हें पंचायत स्तर पर अपनी बात रखने के अवसर देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वास्तविक समानता तभी संभव है, जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हों।
ग्राम पंचायत बैठकों में उठेगा हिंसा रोकथाम का मुद्दा
कार्यक्रम समन्वयक आशा नारंग ने संस्था की गतिविधियों और लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाली बैठकों में महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा की रोकथाम पर नियमित चर्चा होनी चाहिए। समाज में महिलाओं के लिए अपमानजनक शब्दों और गाली-गलौज का इस्तेमाल भी भेदभावपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देता है। ऐसे व्यवहार को रोकने के लिए परिवार, गांव और समाज के स्तर पर जागरूकता जरूरी है।
सरपंचों ने दिया सहयोग का भरोसा
केसरोली पंचायत के बलवंडका सरपंच सब्बीर ने कहा कि संस्था शिक्षा और महिला हिंसा की रोकथाम के क्षेत्र में काम कर रही है। पंचायत की ओर से इस कार्य में पूरा सहयोग दिया जाएगा। कैमाला सरपंच बाबूलाल ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वे सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी जानकारी में कोई अनाथ बच्चा आता है, तो उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का प्रयास करेंगे।
ऊटवाल के पूर्व सरपंच ने बताया कि संस्था ने गांव की पढ़ाई छोड़ चुकी किशोरियों को फिर से शिक्षा से जोड़ने के लिए खुली शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा है। उन्होंने बालिका शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताया।
महिलाओं के शोषण और किशोरियों की शिक्षा पर चर्चा
कार्यशाला में ज्योति दिवाकरी ने महिलाओं के साथ होने वाले शोषण और हिंसा के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि चर्चा के माध्यम से महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को समझने और उसकी रोकथाम के उपायों पर विचार किया गया।
जैबुना ठेगी नास ने कहा कि प्रत्येक पंचायत में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार की मानसिक या शारीरिक हिंसा न हो। हिंसा का असर केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किशोरी बालिकाओं की पढ़ाई और उनके भविष्य पर भी पड़ता है। कई बालिकाएं हिंसा और सामाजिक दबाव के कारण शिक्षा से दूर हो जाती हैं और आगे बढ़ने के अवसर खो देती हैं।
महिला अधिकारों के साथ शिक्षा को भी मिलेगी प्राथमिकता
आशा नारंग ने कहा कि महिलाओं को गलत शब्दों के जरिए रोकना, उनके अधिकारों को दबाना और निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना भी सामाजिक भेदभाव का हिस्सा है। पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या 50 प्रतिशत होने के बावजूद कई जगह उनकी बात नहीं सुनी जाती और वे बैठकों में खुलकर अपनी राय नहीं रख पातीं।
कार्यशाला में शामिल नवनिर्वाचित सरपंचों ने इस स्थिति में बदलाव लाने की आवश्यकता स्वीकार की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अपनी-अपनी पंचायतों में महिलाओं को अधिकार और भागीदारी के अवसर देने, महिला हिंसा की रोकथाम पर चर्चा करने तथा बालिका एवं किशोरी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करेंगे।
कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि महिलाओं की वास्तविक भागीदारी केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पंचायतों के फैसलों में उनकी आवाज और विचारों को भी समान महत्व मिलना चाहिए। इसके लिए पंचायत, परिवार और समाज के स्तर पर मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


