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    मुंबई का 150 साल पुराना ब्रिज अब ‘सिंदूर’ फ्लाईओवर के नाम से जाना जाएगा

    मुंबई: दक्षिण मुंबई में पुनर्निर्मित 'कर्नाक' फ्लाईओवर, 'सिंदूर' फ्लाईओवर के नाम से जाना जाएगा. मुंबई नगर निगम ने बदल दिया है. निगम प्रशासन ने कहा कि कर्नाक फ्लाईओवर को दिया गया 'सिंदूर' नाम भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किए गए सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' से प्रेरित है. नगर निगम प्रशासन ने बताया कि इस पुल का उद्घाटन गुरुवार, 10 जुलाई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस करेंगे.

    कर्नाक फ्लाईओवर किसके नाम पर था: यह पुल दक्षिण मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ता है. पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले इस पुल को पहले कर्नाक ब्रिज के नाम से जाना जाता था. इस पुल का नाम 1839 से 1841 तक मुंबई प्रांत के तत्कालीन गवर्नर जेम्स रिवेट कर्नाक के नाम पर रखा गया था. अब इस पुल का नाम भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम पर 'सिंदूर ब्रिज' रखा गया है.

    समय पर पूरा हुआ पुल का निर्माण: सिंदूर फ्लाईओवर, मस्जिद बंदर रेलवे स्टेशन के पास स्थित है. यह पी. डिमेलो रोड को जोड़ता है. अब इस पुल पर दोनों तरफ से यातायात संभव होगा. अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर के नेतृत्व में इंजीनियरों ने इस पुल का निर्माण किया है. अभिजीत बांगर ने कहा कि नगर निगम के पुल विभाग के इंजीनियरों ने समय पर सिंदूर फ्लाईओवर का निर्माण पूरा किया.

    2022 में ध्वस्त किया गया था पुल: नगर निगम प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पुल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस रेलवे स्टेशन, मस्जिद बंदर और मोहम्मद अली रोड पर यातायात के लिए महत्वपूर्ण है. लगभग 150 साल पुराने ब्रिटिशकालीन कर्नाक ब्रिज को यातायात के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया था. मध्य रेलवे की रिपोर्ट के बाद, इस पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया गया. अगस्त 2022 में इसे ध्वस्त कर दिया गया.

    पुल की लंबाई 328 मीटर: इसके बाद, नए पुल का डिज़ाइन तैयार किया गया. इस नए डिज़ाइन को मध्य रेलवे ने मंज़ूरी दे दी. इसके बाद, पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ. पुल की कुल लंबाई 328 मीटर है, जिसमें से 70 मीटर रेलवे सीमा के भीतर है. पुल पर दो स्टील के गर्डर हैं, जिनमें से प्रत्येक का वज़न 550 मीट्रिक टन है. ये गर्डर 70 मीटर लंबे, 26.5 मीटर चौड़े और 10.8 मीटर ऊंचे हैं. आरसीसी पिलरों पर रखे गए हैं.

    कैसे रखा गया गार्डरः दक्षिणी गर्डर को 19 अक्टूबर, 2024 को सफलतापूर्वक रखा गया था. उत्तरी गर्डर को 26 और 30 जनवरी, 2025 को रखा गया. इसके लिए मध्य रेलवे ने एक विशेष मेगा ब्लॉक लिया था. इस दौरान 550 टन वज़नी गर्डर को रेलवे ट्रैक से 58 मीटर ऊपर उठाया गया. मुंबई नगर निगम के अनुसार, बाद में इसे लगभग 2 मीटर नीचे लाकर आरसीसी पिलरों पर ठीक से रखा गया.

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