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    अलवर में होगा सैनिकों का सम्मान, शहीद स्मारक सहित घर घर दीप जलेंगे

    घर घर दीप जलाने का लोगों से किया आह्वान 

    मिशन सच की अपील –सैनिकों के मान में, हर घर एक दीप जलाए सम्मान में

    मिशन सच न्यूज, अलवर।  15 अगस्त 2025 को   अलवर शहर के शहीद स्मारक पर फिर होगा सैनिकों का सम्मान, फिर से याद किए जाएंगे वे शहीद जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दी। इसी के साथ घर दीप जलाकर भी लोग याद करेंगे अपने शहीदों को। यह केवल कार्यक्रम नहीं उन सैनिकों का सम्मान है जिनके कारण पूरा देश  चैन की नींद सोता है।
    “स्वतंत्रता गौरव उत्सव समिति” द्वारा पिछले नौ वर्षों से यह अद्भुत और अलौकिक आयोजन किया जा रहा है। हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस की संध्या को शहीद स्मारक, कंपनी बाग में 11,000 से अधिक दीपक जलाए जाते हैं। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, एक श्रद्धांजलि है। एक संकल्प है—शहीदों को याद करने का। 
    कार्यक्रम के संयोजक गौरी शंकर विजय व गौरव शर्मा बताते है कि इस कार्यक्रम की शुरुआत एक भावुक पल से हुई थी। समिति का पहला कार्यक्रम 15 अगस्त 2016 को   शहर के होप सर्कस पर हो रहा था, वहां पर एक सैनिक की पत्नी आई, जो युद्ध के हालातों में अपने पति की चिंता में डूबी थी, कहने लगी कि मैं पहली बार देख रही हूं कि सैनिकों के सम्मान में भी कोई कार्यक्रम होता है। बस यूं कहें कि उस महिला के  आंसुओं ने इस आयोजन की नींव रखी। समिति ने महसूस किया कि देशभक्ति केवल झंडा लहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह एक जीवंत भावना होनी चाहिए—जो पीढ़ियों तक जगे, जलाई जाए, और बांटी जाए। उस दिन से ही यह कार्यक्रम हर साल अलवर के शहीद स्थल पर मनाया जाता है। शहीद स्थल को बनवाने में भी इसी समिति की मुख्य भूमिका रही है। 
    हर वर्ष होने वाले कार्यक्रम में दीपकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब यह 11 हजार से अधिक पहुंच गई है।   इन दीपकों  की लौ में सिर्फ तेल और बाती नहीं, बल्कि हर दीप में बसी होती है एक शहीद की कहानी। कोई वह जवान होता है, जिसने बर्फीली चोटियों पर शून्य से नीचे तापमान में तिरंगे की रक्षा करते हुए अंतिम सांस ली थी। कोई वह कैप्टन होता है, जिसने अपनी टोली के साथ शत्रुओं को मात देकर स्वयं मातृभूमि पर शहीद हो गया।
    हर साल जब ये दीपक जलाए जाते हैं, तो न सिर्फ स्मारक रोशन होता है, बल्कि हर अलवरवासी का मन भी दीपमय हो उठता है। युवा बच्चों की आंखों में कौतुहल होता है, तो बुजुर्गों की आंखों में गर्व और गीलेपन की एक चमक। हजारों लोगों के हाथों में तिरंगे ,तिरंगे कलर से पुता हुआ चेहरा और सैनिकों की उपस्थिति इस आयोजन को एक राष्ट्रभक्ति के पर्व में बदल देती है।
    हम लगातार आपको इस कार्यक्रम की अपडेट देते रहेंगे, इसलिए जुड़े रहिए मिशनससच से । 

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    इसी तरह की रोमांचक स्टोरी के लिए देखें मिशन सच की अन्य रिपोर्ट                          https://missionsach.com/dr-dilip-sethi-alwar-pediatrician-biography.html

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