कैंसर पीडित लाइब्रेरियन को प्रताड़ित करने का आरोप
अलवर। बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय, अलवर के वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष प्रहलाद राम बुनकर को सेवानिवृत्ति पर उनके निवास अपनाघर शालीमार, अलवर में शिक्षकों, अधिवक्ताओं और पूर्व विद्यार्थियों द्वारा एक भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर उन्हें माला पहनाकर, साफा बांधकर तथा शुभकामनाओं के साथ सम्मानित किया गया।
रुक्टा डेमोक्रेटिक के प्रदेश संयोजक प्रो. रमेश बैरवा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विदाई समारोह में प्रो. जगतपाल सिंह, प्रो. रामानंद यादव, प्रो. बदलूराम शास्त्री, डॉ. महेश गोठवाल, प्रो. सुंदर बसवाल, डॉ. संजय राय, तथा एडवोकेट शब्बीर खान, एडवोकेट गुलाब साबिर, एडवोकेट लेखराज पांचाल, एडवोकेट अनीशा, गोवर्धन, रईसा सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रहलाद बुनकर के सेवाकाल, समर्पण और सरल व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल पुस्तकालय का सृजनात्मक संचालन किया, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सदैव मार्गदर्शन भी दिया। उनके सेवानिवृत्त होने से महाविद्यालय को एक अनुभवी, सहृदय और कर्मठ पुस्तकालयाध्यक्ष की कमी खलेगी।
इस बीच, कार्यक्रम में उस पीड़ा और अन्याय का भी उल्लेख किया गया जिससे प्रहलाद बुनकर वर्तमान में जूझ रहे हैं। प्रो. बैरवा ने बताया कि वर्ष 2016 से कैंसर से पीड़ित बुनकर का हाल ही में, 15 जुलाई को एम्स दिल्ली में ऑपरेशन हुआ है। ऐसे समय में जब उन्हें सहानुभूति और सहयोग की आवश्यकता थी, तब प्राचार्य डॉ. अशोक आर्य द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
बैरवा ने आरोप लगाया कि प्राचार्य ने जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से बिना पक्ष सुने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाखों रुपये की वसूली का प्रकरण थोप दिया, जिससे बुनकर की पेंशन रोक दी गई है। इससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक आघात झेलना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर विषय यह है कि नो ड्यूज प्रमाण पत्र न दिए जाने के कारण महाविद्यालय की लाइब्रेरी को सील करना पड़ा है, और वर्तमान में कोई उत्तरदायी व्यक्ति पुस्तकालय कार्यभार संभाल नहीं रहा है। इससे आगामी सत्र में विद्यार्थियों को पुस्तकालय सेवाओं से वंचित रहना पड़ेगा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में मांग की कि आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा को हस्तक्षेप कर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए, तथा प्रहलाद बुनकर की पेंशन शीघ्र जारी की जाए। साथ ही, कॉलेज प्रशासन को छात्रों के हित में लाइब्रेरी को तुरंत पुनः संचालित करवाना चाहिए।
अंत में सभी ने बुनकर के स्वस्थ और सम्मानपूर्ण जीवन की कामना की तथा इस अवसर को एकजुटता और शिक्षक-सम्मान के प्रतीक रूप में यादगार बनाने की बात कही।
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