राजस्थान पुजारी महासंघ द्वारा सागर जलाशय पर पितृ पक्ष के अवसर पर सामूहिक तर्पण का आयोजन किया गया। पंडित विवेकानन्द शर्मा व पंडित मोनू शर्मा ने विधिविधान से तर्पण कराया। कार्यक्रम ने समाज में एकता और संस्कार का संदेश दिया।
मिशन सच न्यूज, अलवर । पितृ पक्ष के अवसर पर राजस्थान पुजारी महासंघ द्वारा रविवार को सागर जलाशय पर सर्वपितृ शांति हेतु भव्य सामूहिक तर्पण का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पंडितों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में एकता, आस्था और पारंपरिक संस्कारों को बढ़ावा देना था।
महासंघ के पंडित विवेकानन्द शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि पितृ पक्ष भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह समय है जब हम अपने पितरों को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सामूहिक तर्पण का आयोजन इसीलिए किया गया ताकि समाज के हर व्यक्ति को अपने पूर्वजों का स्मरण करने का अवसर मिले और पूरे समाज में साझा आस्था का संदेश पहुंचे।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। सामूहिक रूप से किए गए इस तर्पण ने गांव-शहर से आए लोगों को एक सूत्र में बांध दिया। पंडित विवेकानन्द ने बताया कि इस अवसर पर केवल अपने पितरों का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के पितरों का भी तर्पण किया गया ताकि सबके परिवार सुख-समृद्धि और आशीर्वाद प्राप्त करें।
कार्यक्रम का संचालन पंडित मोनू शर्मा ने पूरे विधिविधान और मंत्रोच्चारण के साथ किया। वैदिक मंत्रों की ध्वनि और श्रद्धालुओं की आस्था से वातावरण भक्तिमय बना रहा। लोग हाथ जोड़कर अपने पितरों को जलांजलि अर्पित करते हुए भाव-विभोर नजर आए।
इस अवसर पर पंडित राजेंद्र शर्मा, महेश शर्मा, राजकुमार शर्मा, रघुवीर शर्मा, नत्थू राम शास्त्री, रामकिशन शर्मा, श्याम सुंदर पाराशर, चितरंजन शर्मा, योगेश शर्मा, योगानंद शर्मा, रमाकांत शर्मा सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शामिल सभी पंडितों ने एक स्वर में कहा कि पितृ पक्ष न केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय है, बल्कि समाज को संस्कार और परंपराओं से जोड़ने का भी अवसर है।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी हमें अपनी परंपराओं और संस्कारों से जुड़ाव बनाए रखना चाहिए। पितृ पक्ष का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें और आने वाली पीढ़ियों तक इन मूल्यों को पहुंचाएं।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने समाज की खुशहाली और शांति की कामना की। सामूहिक तर्पण के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक श्रद्धा को प्रकट किया बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव और संस्कारों के संरक्षण का भी सशक्त संदेश दिया।


