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    Homeराज्यमध्यप्रदेशमोहन यादव ने कहा- हिंदू और आदिवासियों में फूट डालना चाहते थे...

    मोहन यादव ने कहा- हिंदू और आदिवासियों में फूट डालना चाहते थे अंग्रेज, आज भी हो रही कोशिश

    जबलपुर: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि आदिवासी हिंदू हैं और उनके पूर्वज हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करते थे. भारत का आदिवासी हमेशा सनातनी हिंदू रहा है और उसने कभी हिंदू धर्म नहीं छोड़ा. वहीं जबलपुर में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं का कहना है कि हम पर जबरन सनातन हिंदू धर्म थोपा जा रहा है. हम आदिवासी नहीं है. दरअसल मध्य प्रदेश में आदिवासी जनजाति एक बड़ा वोट बैंक है और इसी वोट बैंक को साधने के लिए आदिवासियों के धर्म की राजनीति हो रही है.

    मुख्यमंत्री बोले गोंडवाना राजा करते थे हिंदू देवी देवताओं की पूजा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जबलपुर के सुभाष चंद्र बोस कन्वेंशन सेंटर में शाहिद शंकर शाह और कुमार रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस के कार्यक्रम में बोलते हुए कहा "अंग्रेजों ने शंकर शाह और रघुनाथ शाह के सामने शर्त रखी थी कि वह हिंदू धर्म छोड़ दें और उनका धर्म अपना लें लेकिन उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा. उन्होंने मरना कबूल किया लेकिन धर्म नहीं छोड़ा."

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी भाषण में इस बात का जिक्र भी किया कि राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के साथ ही उनकी रनिया भी हिंदू देवी माता चंडी की पूजा करती थीं. मोहन यादव ने कहा कि अंग्रेजों के समय में अंग्रेज हिंदू और आदिवासियों के बीच में फूट डालना चाहते थे. आज भी बहुत से लोग ये कोशिश कर रहे हैं. लेकिन भारत का आदिवासी हमेशा सनातनी हिंदू रहा है और उसने कभी हिंदू धर्म नहीं छोड़ा.

    गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेता बोले हम हिंदू नहीं है

    गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राधेश्याम काकोडिया का कहना है, "यह कहना गलत है कि आदिवासी हिंदू हैं. आदिवासी कभी हिंदू नहीं रहा. आदिवासियों की अलग पहचान है. हमारी अलग भाषा है.. हमारा रहन-सहन अलग है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस काटजू ने भी अपने एक आदेश में आदिवासियों को हिंदुओं से अलग परिभाषित किया है. 1931 में अंग्रेजों के काल में भी आदिवासियों के धर्म को अलग पहचान दी गई थी. हम हिंदू नहीं है, हमें जबरन हिंदू ना बनाया जाए."

    राधेश्याम काकोडिया का कहना है कि कुछ बातें ऐसी हैं जो हिंदू धर्म और आदिवासियों में एक सी हैं. उसकी वजह ये है कि आदिवासी धर्म पुराना है और हिंदुओं ने हमारी बहुत सी बातों का अनुसरण किया है. जिस तरह आदिवासी प्रकृति पूजा करते हैं उसी तरह हिंदुओं ने भी प्रकृति की पूजा हमसे सीखी है. हमने किसी से कुछ नहीं सीखा. राधेश्याम काकोड़िया का कहना है कि जो नेता आदिवासी कोटे से चुनाव लड़ते हैं और खुद को हिंदू मानते हैं वे गलत कर रहे हैं.

    उमंग सिंघार में खड़ा किया था मुद्दा

    मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी आदिवासियों के हिंदू होने पर सवाल खड़ा किया था. उनका कहना है कि आदिवासी हिंदू नहीं हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में लगभग एक करोड़ 53 लाख आदिवासी हैं जो मध्य प्रदेश की कुल आबादी का लगभग 21% है. इनमें सबसे ज्यादा संख्या भील आदिवासियों की है. उनकी संख्या लगभग 46 लाख है, दूसरे स्थान पर गोंड आते हैं.

    मध्य प्रदेश में गोंड आदिवासियों की संख्या लगभग 43 लाख थी. इन दोनों मुख्य आदिवासियों के अलावा मध्य प्रदेश में कुल 46 जनजातियों के लोग रहते हैं. मुख्य रूप से लड़ाई इन्हीं आदिवासियों के वोटो की है. आदिवासियों के बीच में इस मुद्दे को हवा देकर राजनीतिक पार्टियां उन्हें अपने पक्ष में करने में जुटी हैं.

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