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    प्रेमानंद महाराज के लिए दुआ करने वाले को जान से मारने की धमकी!

    मथुरा: उत्तर प्रदेश में मथुरा वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत को लेकर देशभर में दुआओं और प्रार्थनाओं का दौर जारी है. हाल ही में प्रेमानंद महाराज का स्वास्थय अचानक बिगड़ा और तरह तरह की बातें देशभर में होने लगीं. इसी बीच सुफियान इलाहबादी नाम के एक शख्स ने मदीना शरीफ में उमराह यात्रा के दौरान मस्जिद-ए-नबवी में प्रेमानंद महाराज के लिए दुआ मांगी थी जिसका वीडियो शख्स ने इंस्टाग्राम पर शेयर भी किया था. लेकिन अब सुफियान को कट्टरपंतियों की ओर से जान से मारने की धमकी मिली है. इन मामलों में किन धाराओं के तहत सजा का प्रावधान है और कितनी सजा मिलती है आइए आपको बताते हैं.

    सबसे पहले तो ये समझें कि धमकी के मायने क्या होते हैं और किस तरह की धमकियों पर गंभीर धाराएं लग सकती हैं. आपको बता दें कि अपराधिक धमकी तब होती है जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को डराने या डर पैदा करने के लिए धमकी देता है. धमकी का मतलब है कि वह कहता है कि अगर तुमने ऐसा नहीं किया या किया तो तुम्हें (या तुम्हारे किसी करीबी को) नुकसान होगा. इसके अलावा जान से मारने की धमकी भी एक गंभीर अपराध मानी जाती है जो सुफियान इलाहबादी को दी गई है. इस तरह की धमकी देना न केवल कानूनी अपराध है बल्कि ऐसा करना किसी की मानसिक शांति और सुरक्षा को भी नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे मामलों से निपटने के लिए भारतीय न्याय संहिता में बहुत अहम धाराएं हैं जो आरोपी को कठोर कारावास दिलवा सकती हैं.

    आपको बता दें कि किसी को जान से मारने की धमकी देने या डर और असुरक्षा का माहौल बनाने के लिए बीएनएस की धारा 351 के तहत कार्रवाई हो सकती है. लेकिन सवाल ये उठता है कि ये धारा या फिर BNS 351(1) (2) (3) (4) लागू कब होती है और हो जाए तो सजा कितनी मिलती है. सबसे पहले फरियादी जब एफआईआर कराता है तो बीएनएस के तहत पहले धारा को एफआईआर में मेंशन किया जाता है. इसके बाद अदालत में इन धाराओं के तहत कार्यवाही चलती है जिसमें आरोपी को 7 साल तक की कैद और भारी जुर्माने से दंडित किया जा सकता है. या फिर और गंभीर मामलो में आरोपी पर आरोप सिद्ध होने की दशा में कारावास और आर्थिक दंड दोनों दिए जा सकते हैं.

    हालांकि जान से मारने की धमकी देने की स्थिति में पुलिस आमतौर पर BNS 351(3) का इस्तेमाल करती है जिसमें किसी शख्स को गंभीर चोट पहुंचाने, जान से मारने या फरियादी के परिवार के सदस्यों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की बात करता है. इसके अलावा अगर कोई अपना नाम और पहचान छिपाकर किसी किसी को धमकी देकर परेशान करने का दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 2 साल की सजा हो सकती है और मोटे जुर्माने से दंडित किया जा सकता है. हालांकि BNS 351(4) में ही ये दशा लागू होती है. लेकिन जान से मारने की धमकी में 351(3) के तहत ही सजा सुनाई जाती है.

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