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    Homeराजस्थानजयपुरLPG के नए रेट लागू, राजस्थान में होटल-रेस्टोरेंट्स को मिलेगी बड़ी राहत

    LPG के नए रेट लागू, राजस्थान में होटल-रेस्टोरेंट्स को मिलेगी बड़ी राहत

    देश में बढ़ती महंगाई के बीच होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए मामूली राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार से राजस्थान में 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 5 रुपये की कटौती की है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। हालांकि, आम जनता के लिए इस्तेमाल होने वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष दीपक गहलोत ने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों की नई रेट लिस्ट के अनुसार, अब 19 किग्रा कॉमर्शियल सिलेंडर 1,618.50 रुपये में उपलब्ध होगा, जो पहले 1,623.50 रुपये था। यह कटौती छोटी जरूर है, लेकिन लगातार तीसरे महीने कीमतों में कमी का सिलसिला बरकरार रखती है।

    पिछले महीनों में भी घटी कीमतें
    पिछले महीने यानी अक्टूबर में कंपनियों ने कॉमर्शियल सिलेंडर पर 15 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिससे व्यापारियों में नाराजगी थी। लेकिन सितंबर में 51 रुपये, अगस्त में 34 रुपये और जुलाई में 58 रुपये की भारी कटौती के बाद यह राहत का सिलसिला जारी है। वर्ष 2025 में अब तक की गई कटौतियों की बात करें तो-

    मई: 24.50 रुपये
    अप्रैल: 40.50 रुपये
    फरवरी: 6 रुपये
    जनवरी: 14.50 रुपये

    इन सभी कटौतियों को मिलाकर साल भर में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कुल 230 रुपये से अधिक कीमत घटाई जा चुकी है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती इसकी मुख्य वजह है।

    घरेलू उपभोक्ताओं को निराशा
    दूसरी ओर, घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 Kg) की कीमत 856.50 रुपये पर अपरिवर्तित बनी हुई है। पिछले कई महीनों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उज्ज्वला योजना और बीपीएल परिवारों को राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है, जिसके तहत उन्हें लगभग 600-650 रुपये में सिलेंडर मिल रहा है। लेकिन बिना सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं को अभी भी महंगाई का बोझ उठाना पड़ रहा है।

    हर महीने होती है समीक्षा
    तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी की कीमतों की समीक्षा करती हैं। यह कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, विनिमय दर और सरकारी नीतियों पर निर्भर करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चा तेल 70-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहा, तो आने वाले महीनों में और कटौती संभव है।

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