अलवर के जैन भवन में आयोजित पिच्छी परिवर्तन और णमोकार मंत्र विधान कार्यक्रम में उपाध्याय विज्ञानन्द महाराज ने कहा कि पिच्छी जैन साधुओं का संयम और जीवों की रक्षा का उपकरण है। इस अवसर पर पवन जैन चौधरी को समाज रत्न की उपाधि दी गई।
मिशनसच न्यूज, अलवर।
अलवर के स्कीम नंबर 10 स्थित जैन भवन में आज धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। दिगम्बर जैन समाज के चातुर्मास पर विराजमान उपाध्याय विज्ञानन्द महाराज ससंघ के सान्निध्य में पिच्छी परिवर्तन और णमोकार मंत्र विधान का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जैन भवन में उमड़ पड़ी और पूरा परिसर जयजयकार से गूंज उठा।
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा और नित्यनियम के साथ हुई। इसके बाद णमोकार महामंत्र विधान और शांतिमहायज्ञ का आयोजन हुआ। इस दौरान जैन संतों का पिच्छी परिवर्तन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर चातुर्मास कमेटी के मुख्य संयोजक पवन जैन चौधरी को उनके समाजसेवी योगदान और उत्कृष्ट संगठनात्मक कार्यों के लिए “समाज रत्न” की उपाधि प्रदान की गई। यह सम्मान उपाध्याय विज्ञानन्द महाराज के करकमलों से दिया गया।
विज्ञानन्द महाराज ने अपने प्रवचन में कहा — “जैन साधु के पास केवल पिच्छी और कमण्डल ही उसके संयम और त्याग का प्रतीक होते हैं। पिच्छी भले ही छोटी वस्तु लगे, पर यह साधु के लिए जीवों की रक्षा और करुणा का साधन है। जिसने अपने जीवन में किसी को उच्चासन पर बिठाया है, उसे भी एक दिन सम्मान और ऊँचा स्थान अवश्य प्राप्त होता है।”
कार्यक्रम में चार प्रमुख जैन समाजों — श्री दिगम्बर जैन अग्रवाल पंचायती मंदिर, श्री दिगम्बर जैन पल्लीवाल मंदिर, श्री दिगम्बर जैन खण्डेवाल पंचायती मंदिर और श्री दिगम्बर जैन बड़तला पंचायती मंदिर — के अध्यक्षों मुकेश कुमार जैन, राजेन्द्र प्रसाद जैन, प्रवीण गोधा और राजेन्द्र जैन एडवोकेट ने मिलकर पवन जैन चौधरी का सम्मान किया।
इस अवसर पर समाज की ओर से पवन जैन चौधरी को अभिनंदन पत्र पढ़कर भेंट किया गया, उन्हें शाल ओढ़ाकर और माला पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही उनकी धर्मपत्नी मधु जैन को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में अन्य श्रेष्ठीजनों को भी सम्मानित किया गया और समाज की एकता, संयम व सेवा भावना की सराहना की गई।
करीब आठ घंटे तक चले इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। जयपुर, दिल्ली, फरीदाबाद सहित विभिन्न स्थानों से आए सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का संयोजन पवन जैन चौधरी और राजेन्द्र प्रसाद जैन द्वारा किया गया।
समारोह के समापन पर विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व में अमन, सद्भावना और करुणा की कामना की गई। पूरे आयोजन में अध्यात्म, संयम और समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी।


