भ्रमण शिविर में किसानों ने सीखी जल प्रबंधन की व्यवहारिक तकनीकें
मिशनसच न्यूज, भीकमपुरा (अलवर)। तरुण भारत संघ और एसबीआई कार्ड के सहयोग से तरुण भारत संघ, तरुण आश्रम भीकमपुरा में तीन दिवसीय “किसान शैक्षणिक भ्रमण शिविर” का आयोजन किया गया। इस शिविर में चंबल–करौली (राजस्थान) क्षेत्र से आए 75 किसानों के दल ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को सामुदायिक विकेन्द्रित जल प्रबंधन की सफल पहल एवं उसके प्रभावों से परिचित कराना था।
तीन दिनों तक चले इस शिविर में किसानों ने तरुण भारत संघ द्वारा किए गए जल संरक्षण और पुनर्भरण कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने मांडलवास, नीलकंठ, तरुण आश्रम, जलतीर्थ तथा गोपालपुरा ग्रामों में पहुँचकर वहाँ की जल संरचनाएँ देखीं और संगठन के अनुभवी कार्यकर्ताओं से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके साथ ही फिल्म प्रदर्शन और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से संघ की जल यात्रा और उसके सामाजिक प्रभावों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान तरुण भारत संघ के निदेशक मौलिक सिसोदिया ने कहा कि “नदियाँ, जोहड़ और तालाब केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और सृष्टि की साझा धरोहर हैं। हमें इन्हें समाजोपयोगी बनाना होगा। किसान प्रकृति का सम्मान करते हुए जीवन का पोषण करता है, यही उसकी असली ऊर्जा है।”
वरिष्ठ कार्यकर्ता गोपाल सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि “यदि प्रकृति नहीं बचेगी तो हमारा अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। किसानों को अपने जोहड़ों, नदियों और तालाबों की रक्षा के लिए स्वयं आगे आना होगा, तभी हरियाली और खुशहाली संभव है।”
रणवीर सिंह ने कहा कि आधुनिक सिंचाई तकनीकों जैसे पाइप और फव्वारा (स्प्रिंकलर) प्रणाली अपनाकर पानी, समय और श्रम की बचत की जा सकती है, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव है। वहीं पारस प्रताप सिंह ने कहा कि समाज में “बदले की नहीं, बदलाव की भावना” आवश्यक है — जल संरक्षण में सहयोग और सद्भाव ही सबसे बड़ी शक्ति है।
शिविर के समापन सत्र में किसानों ने साझा किया कि उनके क्षेत्र में जल संकट गंभीर है और अब वे यहाँ से मिली प्रेरणा के आधार पर अपने गाँवों में सामूहिक जल संरक्षण की पहल करेंगे। उन्होंने आग्रह किया कि तरुण भारत संघ उनके क्षेत्रों में भी ऐसे कार्य आरंभ करे, जिसके लिए वे हर संभव सहयोग देने को तैयार हैं।
इस शिविर के संचालन में मुकेश, निखिल, सुप्रिया, देशराज, सियाराम, अमन सिंह, लालाराम सहित अनेक स्वयंसेवक सक्रिय रहे।
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