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    150 कंप्यूटर लूटे, फाइलें फाड़ीं, बांग्लादेश के मीडिया हाउस में भीड़ का तांडव

    बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हंगामा मचा हुआ है. देश में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. नारेबाजी की गई. आगजनी की गई. साथ ही भीड़ ने मीडिया हाउस पर अटैक किया. शुक्रवार देर रात बांग्लादेश में भीड़ ने ढाका में द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों पर एक साथ हमले किए. इस दौरान कीमती सामान लूटा गया, इमारतों में तोड़फोड़ की गई और पत्रकारों को कई घंटों तक अंदर ही फंसाकर रखा गया. इस दौरान कम से कम 150 कंप्यूटर और कई जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी कर लिए गए, जबकि दफ्तरों की कैंटीन और फाइलों को भी तहस-नहस कर दिया गया |

    बांग्लादेश में लोगों का गुस्सा छात्र नेता हादी की मौत के बाद फूटा. हादी को हाल ही में सिर पर गोली मारी गई थी. इसी के बाद उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था. लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका. 18 दिसंबर को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत का ऐलान किया. उनके यह ऐलान करने के बाद से ही देश में हंगामा मच गया. लोगों का गुस्सा मीडिया हाउस पर भी फूटा |

    ऑफिस में मचाई तबाही

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ये अखबार अशांति फैलाने और राजनीतिक हितों से जुड़े हुए हैं, हालांकि दोनों मीडिया संस्थानों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. द डेली स्टार के काजी नजरुल इस्लाम एवेन्यू स्थित दफ्तर में हमलावरों ने आधी रात के आसपास जबरन घुसपैठ की. उन्होंने फर्नीचर और कांच के दरवाजे तोड़ दिए, कंप्यूटर, कैमरे और हार्ड ड्राइव नष्ट कर दीं, शहीद अबू सैयद और मीर महफूजुर रहमान मुग्धो के पोस्टर फाड़ दिए और कई मंजिलों में आग लगा दी |

    हालात इतने बिगड़ गए कि आग की लपटों और घने धुएं की वजह से पत्रकारों को छत पर जाना पड़ा. 28 पत्रकारों और कर्मचारियों को कई घंटों तक छत पर शरण लेनी पड़ी. खोजी पत्रकार जायमा इस्लाम ने फेसबुक पर लिखा, मैं अब सांस नहीं ले पा रही हूं. बहुत ज्यादा धुआं है. मैं अंदर फंसी हूं. आप मुझे मार रहे हैं. दमकलकर्मियों, पुलिस और सेना के जवानों ने सुबह करीब 5 बजे फंसे हुए पत्रकारों को बाहर निकाला |

    अखबार नहीं हुआ प्रसारित

    भीड़ के इस हमले से दफ्तर को भारी नुकसान हुआ और बिजली, पानी और गैस की आपूर्ति काट दी गई. हालात इतने बिगड़ गए कि द डेली स्टार अपने 34 साल के इतिहास में पहली बार अपना अखबार नहीं छाप सका |

    इमारत को किया तहस-नहस

    न सिर्फ डेली स्टार बल्कि प्रोथोम आलो पर भी हमला हुआ. प्रोथोम आलो के कारवां बाजार स्थित मुख्यालय में हमलावरों ने रात करीब 11:15 बजे हमला शुरू किया. शुरुआत में पुलिस ने उन्हें रोका, लेकिन भीड़ फिर से इकट्ठा हुई और बड़े पैमाने पर हमला किया. इस दौरान ऑफिस की खिड़कियां, फर्नीचर, कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी सिस्टम और कैश लॉकर तोड़ दिए गए. ग्राउंड फ्लोर से लेकर दूसरी मंजिल तक का हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया और इमारत के ओटीटी प्लेटफॉर्म चोरकी को भी भारी नुकसान पहुंचा |

    छत पर भागे पत्रकार

    कर्मचारियों को जान बचाकर भागना पड़ा. एक कर्मचारी छत से पास की इमारत में कूद गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं. मीडिया हाउस अपने 27 साल के इतिहास में पहली बार शुक्रवार को अपना अखबार नहीं छाप सका. साथ ही ऑनलाइन सेवाएं भी करीब 17 घंटे तक बंद रहीं |

    साथ ही प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोका इसी वजह से दमकल सेवाओं को पहुंचने में देरी हुई. दो फायरफाइटर, एमडी आलमगीर और एमडी शफिउल आलम को करंट लग गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाद में पुलिस, सेना ने मिलकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला | हिंसा केवल मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं रही. धानमंडी में भीड़ ने छायानट भवन पर हमला किया और संगीत वाद्ययंत्रों, कलाकृतियों और दफ्तरों में तोड़फोड़ की |

    किन इलाकों में फैली हिंसा

    प्रदर्शन चटगांव, राजशाही, उत्तरा और अन्य इलाकों तक फैल गए, जहां राजनीतिक और सांस्कृतिक संस्थानों को निशाना बनाया गया. चटगांव में प्रदर्शनकारियों की ओर से सहायक भारतीय उच्चायोग पर पत्थर फेंके जाने के बाद पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया |

    अंतरिम मुख्य सलाहकार प्रो. मुहम्मद यूनुस ने संपादक मतीउर रहमान और महफूज अनाम से बात कर गहरा दुख जताया और सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया. सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार मोस्तोफा सरवर फारूकी ने क्षतिग्रस्त संस्थानों की मरम्मत में मदद का आश्वासन दिया |

    एडिटर्स काउंसिल, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) और मीडिया फ्रीडम कोएलिशन सहित राजनीतिक दलों और मीडिया संगठनों ने इन हमलों की निंदा की. स्थानीय पत्रकारों और नागरिक नेताओं ने हमलावरों को समझाने की कोशिश की, जिसके बाद दमकल कर्मियों और पुलिस को आग पर काबू पाने का मौका मिला |

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