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    4 साल में रेबीज फ्री होंगे मध्य प्रदेश के 6 शहर, अकेले ग्वालियर में ही हर दिन सैकड़ों डॉग बाइट के मामले

    ग्वालियर : डॉग बाइट्स और अटैक के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश के लगभग 100 शहरों को रेबीज फ्री करने का फैसला लिया, जिसमें मध्य प्रदेश के 6 शहर शामिल हैं. इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, रतलाम के साथ ग्वालियर भी शामिल है, जिसे 2030 तक रेबीज फ्री बनाया जाएगा. इनमें से अकेले ग्वालियर में ही हर दिन 150 से 200 मरीज डॉगबाइट के सामने आ रहे हैं, जबकि 18 लाख की आबादी वाले ग्वालियर में इन जानवरों के बर्थ कंट्रोल के लिए सिर्फ एक एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर है. इस सब के बीच ग्वालियर नगर निगम ने भी आवारा कुत्तों से निपटने के लिए राज्य सरकार को अपना एक्शन प्लान दिया है.

    कभी नहीं हुई कुत्तों की गणना, आबादी अंदाजा 50 हजार

    ग्वालियर में इंसान ही नहीं बल्कि डॉग्स की आबादी भी तेजी से बढ़ती जा रही है, नगर निगम की माने तो शहर में लगभग 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं. लेकिन वास्तविकता देखी जाए तो शहर में आवारा कुत्तों की गणना कभी हुई ही नहीं, ऐसे में आबादी लगातार बढ़ रही है, जो आम लोगों बुज़ुर्गो और बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं. इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर के साथ ग्वालियर नगर निगम ने भी शहर को रेबीज फ्री बनाने की प्लानिंग कर ली है.

    डॉग रजिस्ट्रेशन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे लोग

    नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों के साथ ही पेट डॉग्स के लिए भी वैक्सीनेशन ड्राइव चलाने का काम शुरू किया गया है, जिसके लिए ग्वालियर के चिड़ियाघर में पंजीयन कराए जा रहे हैं लेकिन शहर के लोगों की उतनी रुचि दिखाई नहीं दे रही है. यही वजह कि ग्वालियर में अब तक बमुश्किल चार सौ लोगों ने ही अपने पालतू कुत्तों का पंजीयन कराया है. हालांकि, नगर निगम द्वारा संचालित ग्वालियर चिड़ियाघर के प्रभारी गौरव परिहार ने कहा, '' आम तौर पर कुत्तों को पालने वाले लोग जागरूक होते हैं और वे हर साल अपने पेट्स को एंटी रेबीज और जरूरी अन्य वैक्सीन खुद से लगवाते हैं. लेकिन आवारा कुत्तों की समस्या मुख्य तौर पर है इसलिए नगर निगम द्वारा इसके लिए एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर संचालित होता है जिसमें इन स्ट्रीट डॉग्स को स्टेरीलाइज किया जाता है और एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है.''

    हर साल 60-70 लाख रु हो रहे खर्च

    गौरव परिहार के मुताबिक, '' हर दिन नगर निगम द्वारा 15-20 आवारा डॉग्स को स्टेरिलाइज किया जाता है. जिसके लिए निगम का अमला लगातार शहर भर में काम करता है.'' वहीं इस काम में आने वाले खर्चे के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि इस काम के लिए नगर निगम हर साल लगभग 60-70 लाख रु खर्च करता है.

    रेबीज फ्री शहर बनाने में होगा 6 से 7 करोड़ रु का खर्चा

    अब आगे की प्लानिंग है कि निगम क्षेत्र को रेबीज फ्री करने के लिए ग्वालियर नगर निगम ने करीब 7 करोड़ रु का प्रपोजल केंद्र सरकार को दिया है. इस प्रपोजल के मुताबिक ग्वालियर नगर निगम संस्थाओं के जरिए 6 महीने में ग्वालियर को रेबीज फ्री करने की दिशा में काम करेगा. जिसमे एम्बुलेंट्री वैन की जरूरत होगी, जिसमें एंटी रेबीज वैक्सीन स्टोर की जा सकें. साथ ही इस वैन में एक डॉक्टर, कंपाउंडर, पैरामेडिक होंगे और साथ ही प्रशिक्षित डॉग कैचर्स की तीन टीम्स बनाई जाएंगी, इस काम को ग्वालियर में विधानसभा वार पूरा किया जाएगा.

    अतिरिक्त एबीसी सेंटर बनेगा, डॉग कैचर व्हीकल भी खरीदेगा निगम

    ग्वालियर को रेबीज फ्री सिटी बनाने के टारगेट पर ज्यादा जानकारी देते हुए ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने ईटीवी भारत को बताया, '' ग्वालियर में वर्तमान में बिरलानगर में एक एबीसी सेंटर संचालित है अब इसके साथ ही एक और एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर शहर के लक्ष्मीगंज इलाके में भी बनकर तैयार हो चुका है. साथ ही ग्वालियर में डॉग रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिए गए हैं. इसे और सरल बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल वकसित करने की व्यवस्था भी बनाई जा रही है, जो नगर निगम की वेबसाइट से ही लिंक रहेगा.'' निगम आयुक्त ने यह भी बताया कि, ग्वालियर में एक अतिरिक्त डॉग कैचर व्हीकल भी खरीदा जाएगा.

    डॉग बाइट काउंट का तरीका ग़लत, फिर भी हालत चिंताजनक

    नगर निगम कमिश्नर ने कहा, '' ग्वालियर में जो डॉग बाईट केस रिपोर्ट हो रहे हैं वह अस्पतालों में लगने वाली एंटी रेबीज वैक्सीन के हिसाब से काउंट कर लिया जा रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं कोई डॉग बाइट का मरीज अगर दूसरा डोज या तीसरा डोज भी लगवाने जाता है तो उसे सेपरेट केस मान लिया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों के केस भी शहर में इंजेक्शन लगवाने की वजह से यही काउंट कर लिए जाते हैं. साथ ही अन्य जानवरों के बाइट केस भी डॉगबाइट में ही दर्शा दिए जाते हैं, जिस कारण यहां आंकड़ा काफी बढ़ा हुआ दिखाई देता है. लेकिन वास्तविक स्थिति भी चिंताजनक है, जिस पर काम किया जा रहा है.''

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