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    क्षत्रियों का बड़ा नेता राजा भैया या कौन? बृजभूषण शरण सिंह का तीखा बयान

    लखनऊ|यूपी की राजनीति में क्षत्रिय नेताओं में बड़ा कौन को लेकर छिड़ी बहस के बीच बृजभूषण शरण सिंह कड़ा रिएक्शन आया है। क्षत्रिय समाज में सबसे बड़ा कौन की बहस पर बृजभूषण शरण सिंह का गुस्सा फूटा है। बृजभूषण ने स्पष्ट रूप दो टूक में कहा कि राजा भैया का इतिहास जानना है तो उनके पिता उदय प्रताप सिंह का इतिहास जानें। उन्होंने कहा कि राजा भैया के पिता को मैं आदर्श मानता हूं।उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की कैसरगंज लोकसभा सीट से बीजेपी पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक बयान सामने आया। इस बयान में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मैं पहले बोल चुका हूं कि जाकी रही भावना जैसी, हरि मूरत देखी तिन तैसी। राष्ट्र कथा को जो जिस नजर से देखेगा, उसको वही मिलेगा। यह राष्ट्र कथा जोड़ने के लिए थी तोड़ने के लिए नहीं। पूर्व सांसद बृजभूषण ने कहा कि एक पोस्टर से उन्हें तकलीफ हुई है। राजा भैया क्षत्रियों के बड़े नेता हैं या फिर बृजभूषण शरण सिंह? इस पोस्टर से नाराज बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि स्पष्ट रूप से बता दूं कि राजा भैया का अगर इतिहास जानना है तो उनके पिता महराज उदय प्रताप सिंह का इतिहास जानें।

    उदय प्रताप सिंह संघर्ष के प्रतीक

    बृजभूषण सिंह ने आगे कहा कि राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह संघर्ष के प्रतीक हैं। हम उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। राजा भैया उनके बेटे हैं। बृजभूषण ने कहा कि उम्र में राजा भैया हमारे छोटे भाई हैं। इसके साथ ही मेरे बेटों के दोस्त भी हैं, इसलिए ऐसी बकवासबाजी बंद करिए।

    सैकड़ों गाड़ियों का जश्न जुलूस, बुलडोजर से बरसे फूल; बृजभूषण का जन्मदिन पर दबदबा

    पूर्व सांसद के जन्मदिन पर हुआ कथा समापन

    आपको बता दें कि सरयू तट स्थित नंदिनी निकेतन में 1 जनवरी से आयोजित राष्ट्र कथा महोत्सव का समापन पूर्व सांसद के जन्मोत्सव के अवसर पर पूरे विधि-विधान के साथ हुआ था। कथा सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने सुनाई थी। भाजपा पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन पर गुरुवार को सैकड़ों गाड़ियों का जश्न जुलूस निकाला गया था। काफिले में खुली जीप पर सवार बृजभूषण शरण पर रास्ते में फूल बरसाए गए थे। फूल वर्षा के लिए बुलडोजर भी लगाए गए थे। इस दौरान बृजभूषण का दबदबा भी दिखा। इस दौरान संतों का आशीर्वाद, कथा महोत्सव का समापन और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे।

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