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    हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार: मिड-डे मील में लापरवाही देख भड़के जज, 3 शिक्षक तत्काल निलंबित

    CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मिड-डे मील से बच्चों के बीमार होने के गंभीर मामले में राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बार फिर मुख्य सचिव को कटघरे में खड़ा किया है. स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मिड-डे मील व्यवस्था, सेंट्रल किचन सिस्टम और आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई.

    कोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर स्वीकार किया कि मिड-डे मील सेवन से प्रभावित 25 बच्चों के माता-पिता को 5-5 हजार रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है. कुल 1 लाख 25 हजार रुपए की राशि 19 जनवरी 2026 को चेक के माध्यम से वितरित की गई.

    मिड-डे मील पर हाईकोर्ट की सख्ती, 3 शिक्षक निलंबित
    कोर्ट कमिश्नर अमियकांत तिवारी ने अदालत को अवगत कराया कि दूषित मिड-डे मील की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन अब तक उनकी सेवा समाप्ति को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. इस पर कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, क्योंकि फरवरी 2026 में परीक्षाएं प्रस्तावित हैं.

    सेंट्रल किचन सिस्टम लागू करने के निर्देश
    मुख्य सचिव के हलफनामे में बताया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने 15 जनवरी 2026 को सेंट्रल किचन सिस्टम लागू करने का आदेश जारी किया है. इसके तहत संबंधित समिति को योजना का ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में दुर्ग और बिलासपुर मॉडल की तर्ज पर पूरे राज्य में सेंट्रल किचन लागू करने की सिफारिश की है.

    खस्ताहाल आंगनबाड़ी केंद्रों पर जताई नाराजगी
    कोर्ट के समक्ष पेश तस्वीरों और रिपोर्ट में यह सामने आया कि जहां बच्चों को मिड-डे मील कराया जा रहा है, वहां न तो स्वच्छता है और न ही बुनियादी सुविधाएं. टीन शेड, फर्श और बैठने की व्यवस्था बदहाल पाई गई. इस पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि भोजन स्थल को बच्चों के अनुकूल और गरिमापूर्ण बनाया जाए.

    आंगनबाड़ी सुधार के लिए करोड़ों की राशि स्वीकृत
    मुख्य सचिव के दूसरे हलफनामे में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा शौचालय निर्माण व मरम्मत के लिए 3.31 करोड़ रुपये, पेयजल व्यवस्था के लिए 9.81 करोड़ रुपये, मरम्मत कार्यों के लिए 9.55 करोड़ रुपये, 38924 आंगनबाड़ी भवनों के रखरखाव के लिए 11.67 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. इसके अलावा बिलासपुर जिले की आंगनबाड़ियों के उन्नयन के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 4.72 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है.

    कोर्ट ने मांगा नया हलफनामा
    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा. मुख्य सचिव को कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का विस्तृत नया हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं. मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को होगी.

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