बजट में उद्योग और कारोबार पर फोकस, लेकिन वेतनभोगी वर्ग रहा अपेक्षाओं से दूर
मिशनसच न्यूज, अलवर। केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कर विशेषज्ञ योगेश राव ने कहा कि इस बजट में सरकार का फोकस स्पष्ट रूप से उद्योग, कॉरपोरेट और MSME सेक्टर को सशक्त बनाने पर रहा है। कॉरपोरेट सेक्टर के लिए टैक्स अनुपालन को सरल बनाने, विवादों में कमी लाने और निवेश-अनुकूल माहौल तैयार करने वाले प्रावधान इस बात का संकेत हैं कि सरकार आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए निजी निवेश को बढ़ावा देना चाहती है।
उन्होंने कहा कि इससे व्यापारिक विश्वास मजबूत होगा और दीर्घकाल में रोजगार सृजन को बल मिलेगा। विशेष रूप से MSME सेक्टर को TDS दरों में युक्तिकरण, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और नकदी प्रवाह में सुधार जैसी राहतें दी गई हैं, जो छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बड़ा संबल साबित होंगी। MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस बजट से इसे निश्चित रूप से बूस्ट मिलेगा।
कर विशेषज्ञ राव ने TDS और TCS प्रावधानों में दी गई राहत को भी सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि दरों में कमी और नियमों की सरलता से कारोबारियों, पेशेवरों और आम करदाताओं—तीनों को टैक्स अनुपालन में सुविधा मिलेगी और अनावश्यक कर बोझ कम होगा।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बजट का यह सकारात्मक पक्ष वेतनभोगी करदाताओं की उम्मीदों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर सका। बढ़ती महंगाई के बीच स्टैंडर्ड डिडक्शन में वृद्धि, धारा 80C की सीमा बढ़ाने और मकान ऋण पर ब्याज में अतिरिक्त राहत की अपेक्षा थी, लेकिन इन मोर्चों पर कोई घोषणा न होने से मध्यम वर्ग निराश हुआ है।
कुल मिलाकर यह बजट कॉरपोरेट और MSME सेक्टर के लिए कारोबार-अनुकूल जरूर है, लेकिन वेतनभोगी मध्यम वर्ग को प्रत्यक्ष कर राहत न मिलना इसकी प्रमुख कमी के रूप में सामने आता है। संतुलित आर्थिक विकास के लिए भविष्य में इस वर्ग पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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