रुद्राक्ष को भगवान शिव का महाप्रसाद कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र मनका शिव के आंसुओं से उत्पन्न हुआ था. रुद्राक्ष केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला भी माना जाता है. हालांकि रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसके नियम, सही विधि और लाभ जानना बेहद जरूरी है. अगर नियमों का पालन न किया जाए तो इसका पूरा फल नहीं मिल पाता. महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 पर यदि आप रुद्राक्ष पहनने की सोच रहे हैं, तो नीचे बताए गए सात जरूरी बिंदुओं को जरूर जान लें.
1. महाशिवरात्रि पर रुद्राक्ष धारण करने का शुभ समय रुद्राक्ष पहनने के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत शुभ माना गया है. खासकर निशीथ काल में रुद्राक्ष धारण करना श्रेष्ठ फल देता है. इस समय मन और शरीर दोनों को साफ रखना चाहिए. स्नान के बाद ही पूजा या धारण की प्रक्रिया शुरू करें.
2. सही रुद्राक्ष का चयन कैसे करें हर व्यक्ति के लिए अलग मुखी रुद्राक्ष उपयुक्त माना जाता है. बाजार से रुद्राक्ष खरीदने से पहले किसी जानकार या ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है. कटा, फटा या छेद वाला रुद्राक्ष कभी न लें.
3. रुद्राक्ष की पूजा विधि महाशिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष को पहले गंगाजल से धो लें. इसके बाद उसे शिवलिंग के पास रखें. फूल, चंदन, धूप और दीप से पूजा करें. फिर “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें.
4. रुद्राक्ष पहनने की सही विधि मंत्र जाप के बाद रुद्राक्ष को लाल या सफेद धागे में पिरो लें. इसे गले, कलाई या बाजू में धारण किया जा सकता है. इसे भगवान शिव का प्रसाद मानकर पूरे विश्वास के साथ पहनें.
5. रुद्राक्ष से जुड़े जरूरी नियम किसी और का पहना हुआ रुद्राक्ष कभी न पहनें. रुद्राक्ष को जमीन पर न रखें. शौच या अंतिम संस्कार में जाने से पहले इसे उतारकर साफ जगह पर रखें.
6. रुद्राक्ष पहनने वालों को किन बातों से बचना चाहिए रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को मांस, शराब और नशे से दूरी बनानी चाहिए. सोते समय रुद्राक्ष को उतारकर पूजा स्थान में रखना अच्छा माना जाता है.
7. रुद्राक्ष धारण करने के धार्मिक लाभ मान्यता है कि रुद्राक्ष पहनने से शिव कृपा बनी रहती है. इससे भय, मानसिक तनाव और नकारात्मक सोच दूर होती है. व्यक्ति को आत्मविश्वास, शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.


