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    ‘मां बागेश्वरी की प्रतिमा जहां, वहां मस्जिद कैसे?’ भोजनशाला विवाद पर रामेश्वर शर्मा का बयान

    मध्य प्रदेश के धार| में स्थिर भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के लेकर विवाद की सुनवाई हाई कोर्ट में की जा रही है. कोर्ट में पेश की गई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को खुलासे के बाद हिंदू पक्ष उत्साहित है तो वहीं मुस्लिम पक्ष इसे खारीज करते हुए 1903 वाले सर्वेक्षण को याद दिला रहा है. इसी बीच हूजूर विधानसभा से विधायक रामेश्वर शर्मा का एक बड़ा बयान सामने आया है. हालांकि वो इससे पहले भी विवादित भोजशाला को लेकर बयान देते रहे हैं|

    जहां प्रतिमा है वहां इबादत स्वीकार कैसे हो सकती है-रामेश्वर शर्मा

    पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट आने के बाद विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा ‘हम तो पहले से ही कह रहे है कि भोजशाला माँ सरस्वती का मंदिर है. भोजशाला के एक एक खम्बे पर माँ बागेश्वरी की प्रतिमा है. फिर वहाँ मस्जिद कैसे हो सकती है.’ उन्होंने आगे कहा कि- इस्लाम में लिखा है की किसी प्रतिमा के सामने इबादत क़ुबूल नहीं हो सकती फिर भोजशाला में इबादत कैसे क़ुबूल होगी. आज पुरातत्व विशेषज्ञ मोहम्मद का बयान भी मैंने अखबार में देखा उनके अनुसार भी भोजशाला, मथुरा, ज्ञानवापी हिंदुओं की है इसपर विवाद नहीं होना चाहिए|

    एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में क्या मिला?

    ASI द्वारा 98 दिनों तक किए गए सर्वे रिपोर्ट में मांडू के छप्पन महल संग्रहालय में रखी नायिका और धार के जिला संग्रहालय में सुरक्षित अर्धनारीश्वर के साथ ही धार किला में संग्रहित 11 वीं शताब्दी की भगवान कुबेर की मूर्तियों को भी भोजशाला में मंदिर होने के साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है. ये तीनों मूर्तियां पूर्व में भोजशाला परिसर की खोदाई के दौरान मिली थीं. इस सर्वे रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि स्वतंत्रता से पहले भोजशाला परिसर से कुछ महत्वपूर्ण अवशेष ब्रिटिश अधिकारी ले गए हैं|

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