More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशवन विभाग की शीर्ष नियुक्ति पर विवाद, ‘शुभरंजन सेन’ के नाम पर...

    वन विभाग की शीर्ष नियुक्ति पर विवाद, ‘शुभरंजन सेन’ के नाम पर उठे सवाल

    भोपाल|मध्यप्रदेश के वन महकमे में नए वन बल प्रमुख (PCCF) की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. वन्य प्राणी एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी शुभरंजन सेन को वन बल प्रमुख बनाए जाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है. दुबे ने अपने पत्र में कहा है कि सेन के कार्यकाल से जुड़े कथित विवादों और शिकायतों को देखते हुए उनकी नियुक्ति से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए. उनका तर्क है कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए|

    वन्यजीव शिकार मामलों का हवाला

    पत्र में वर्ष 2024 से 2026 के बीच बाघ, तेंदुआ, हाथी और अन्य संरक्षित प्रजातियों की कथित रिकॉर्ड मौतों का उल्लेख किया गया है. बालाघाट में शिकार किए गए बाघ के मामले में सबूत नष्ट करने और नर्मदापुरम में काले हिरण प्रकरण में कथित गलत रिपोर्टिंग जैसे आरोपों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इन मामलों में निगरानी और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठे थे. दुबे का कहना है कि इन घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है. उन्होंने मांग की है कि शीर्ष पद पर नियुक्ति से पहले इन मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए|

    प्रशासनिक पदस्थापनाओं पर आपत्ति

    पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों को लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रखा गया, सेवा विस्तार और वित्तीय स्वीकृतियों में पारदर्शिता नहीं बरती गई. टाइगर स्ट्राइक फोर्स की कार्यप्रणाली और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े मामलों में निगरानी की कमी को भी गंभीर मुद्दा बताया गया है. इसके अलावा, संरक्षित क्षेत्रों में विशेष अनुमति देकर फिल्मांकन की अनुमति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों पर भी सवाल उठाए गए हैं. दुबे ने प्रधानमंत्री की ‘भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता’ नीति का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है|

    सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

    वन विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया शासन स्तर पर विचाराधीन है. वन बल प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति को लेकर उठे ये सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को और तेज कर सकते हैं. अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और नियुक्ति प्रक्रिया में क्या निर्णय लिया जाता है|

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here