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    पीएम कुसुम योजना से मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा का विस्तार, किसानों की जमीन पर बनेगी 1000 मेगावाट बिजली

    भोपाल। किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम) योजना के तहत मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है. किसानों की जमीन पर स्थापित किए जा रहे सोलर प्लांटों के चलते प्रदेश 1000 मेगावाट की स्वीकृत क्षमता के लक्ष्य के करीब पहुंच गया है और कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन भी शुरू हो चुका है।

    योजना के तहत लगाए जा रहे सौर ऊर्जा संयंत्र

    योजना के घटक ‘ए’ के तहत किसानों, किसान समूहों, सहकारी समितियों और पंचायतों की बंजर या परती जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं. योजना में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में एक विशेष सेल स्थापित करने का निर्णय लिया है, जो बिजली खरीदी अनुबंध (पीपीए) से जुड़े मामलों में किसानों को मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेगा।दिसंबर 2025 तक प्रदेश में स्वीकृत 1000 मेगावाट क्षमता के लक्ष्य के मुकाबले 997 मेगावाट क्षमता के 603 विद्युत क्रय अनुबंध किए जा चुके हैं. इनमें से करीब 50 परियोजनाओं में बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि अन्य परियोजनाओं पर काम जारी है. योजना के तीसरे चरण में अब तक 220 किसानों के साथ बिजली खरीदी के अनुबंध किए गए हैं।

    लीज पर भी दे सकते हैं जमीन

    योजना में यह प्रावधान भी रखा गया है कि यदि किसान स्वयं निवेश करने में सक्षम नहीं हैं तो वे अपनी जमीन निवेशक या डेवलपर को लीज पर दे सकते हैं. किसान और निवेशक के बीच द्विपक्षीय अनुबंध के आधार पर प्रति एकड़ वार्षिक किराया या प्रति यूनिट बिजली उत्पादन के आधार पर भुगतान तय किया जा सकता है।

    25 साल तक 3.25 रुपये प्रति यूनिट पर खरीदी जाएगी बिजली

    कृषि भूमि पर स्थापित सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली को सरकार 3.25 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी. इसके लिए उत्पादक और बिजली कंपनियों के बीच 25 वर्ष का दीर्घकालिक अनुबंध किया जाएगा. ऊर्जा विभाग के अनुसार यदि सभी प्रस्तावित सोलर प्लांट स्थापित हो जाते हैं तो प्रदेश की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा. इससे किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

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