गोलोक धाम परियोजना के तहत गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर, अभयारण्य के रूप में विकसित होगा केंद्र
जयपुर। जयपुर-कोटा हाईवे स्थित चाकसू तहसील के निमोडिया गांव में बेसहारा और बीमार गायों के लिए ‘गोलोक धाम’ के रूप में एक विशाल अभयारण्य का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यह पहल आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से शुरू की गई है।

करीब 21 बीघा भूमि पर विकसित हो रहे इस प्रकल्प का उद्देश्य सड़क पर भटकने वाली, बीमार और बेसहारा गायों को सुरक्षित आश्रय और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है। आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने बताया कि यह केवल एक गौशाला नहीं, बल्कि गोवंश के लिए एक समग्र अभयारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस केंद्र में गाय के जीवन चक्र और उसके महत्व को समाज तक पहुंचाने के साथ-साथ दूध, गोबर और गोमूत्र के उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाएगी। साथ ही गायों को प्राकृतिक और खुला वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
परियोजना से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, गोलोक धाम को आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां जैविक खेती, गोबर से खाद निर्माण, गोमूत्र आधारित उत्पाद और दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे यह केंद्र आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सके।
गोलोक धाम के अध्यक्ष देवेंद्र बाकलीवाल और प्रशासनिक मंत्री चेतन निमोड़िया ने बताया कि यह केंद्र पशु सेवा के साथ-साथ ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का भी प्रमुख माध्यम बनेगा। वहीं महामंत्री अमित जैन ने कहा कि स्थानीय समिति इस प्रकल्प के संचालन और विस्तार में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और पहले चरण में 300 गायों के संरक्षण की व्यवस्था की जा रही है। 15 फरवरी से शुरू इस चरण में अब तक 80 गायों को आश्रय दिया जा चुका है। साथ ही आचार्य श्री के एक करोड़ वृक्षारोपण के संकल्प को भी इस भूमि पर साकार करने की योजना है।
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