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    Homeराज्यछत्तीसगढ़आज़ादी के 78 साल बाद गांव में पहली बार आई बिजली

    आज़ादी के 78 साल बाद गांव में पहली बार आई बिजली

    अबूझमाड़ के अंधेरे पर विकास की विजय: आजादी के दशकों बाद पहली बार 'ईरपानार' गांव में पहुंची बिजली

    नारायणपुर: छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ क्षेत्र, जिसे अपनी दुर्गमता और घने जंगलों के लिए जाना जाता है, आज एक ऐतिहासिक परिवर्तन का गवाह बना है। नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर बसा ईरपानार गांव, जो आजादी के बाद से अब तक अंधकार में डूबा हुआ था, वहां पहली बार बिजली के बल्ब जगमगा उठे हैं। यह केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों के जीवन में एक नई सुबह की शुरुआत है जिन्होंने पीढ़ियों से रोशनी का इंतजार किया था।

    चुनौतियों का हिमालय और जांबाज कर्मचारी

    ईरपानार तक बिजली पहुँचाना किसी हिमालयी चुनौती से कम नहीं था। यह गांव न केवल घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित है, बल्कि नक्सल प्रभावित होने के कारण यहाँ सुरक्षा और निर्माण संबंधी बाधाएं भी चरम पर थीं।

    • दुर्गम रास्ता: यहाँ पहुँचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। पथरीले रास्तों, खड़ी चढ़ाइयों और कई किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद ही गांव तक पहुँचा जा सकता है।

    • प्राकृतिक बाधाएं: मानसून के दौरान यह इलाका बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कर्मचारियों ने हार नहीं मानी और बिजली के भारी खंभे और तार गांव की सरहद तक पहुँचा दिए।


    जब मशीनों ने हाथ खड़े किए, तो कंधों ने संभाली कमान

    इस परियोजना की सबसे गौरवशाली बात ग्रामीणों और प्रशासन का आपसी सहयोग रहा। कई ऐसे स्थान थे जहाँ मशीनें या वाहन ले जाना नामुमकिन था।

    • अतुलनीय श्रम: नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने इस उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उपकरण और भारी खंभों को मीलों दूर तक ले जाने के लिए लोगों ने उन्हें अपने कंधों पर ढोया।

    • साझा संकल्प: खंभे गाड़ने से लेकर तारों को खींचने तक, हर कदम पर कठिन शारीरिक श्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता थी। प्रशासन और बिजली विभाग की टीम का एक ही लक्ष्य था—अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के घर को रोशन करना।


    सिर्फ रोशनी नहीं, विकास के नए द्वार खुलेंगे

    ईरपानार में बिजली के आगमन से ग्रामीणों की जीवनशैली में क्रांतिकारी बदलाव आने तय हैं:

    1. शिक्षा और भविष्य: अब गांव के बच्चे रात के अंधेरे में चिमनी या लालटेन के भरोसे नहीं रहेंगे। बिजली की रोशनी में वे देर तक पढ़ाई कर सकेंगे, जिससे उनकी शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।

    2. डिजिटल कनेक्टिविटी: ग्रामीण अब अपने मोबाइल फोन आसानी से चार्ज कर सकेंगे और बाहरी दुनिया से बेहतर तरीके से जुड़ पाएंगे। यह संचार क्रांति गांव के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगी।

    3. आधुनिक सुविधाएं: पंखे, टेलीविजन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से दैनिक जीवन की कठिनाइयां कम होंगी और रहन-सहन का स्तर ऊपर उठेगा।

    खुशी से रात भर नहीं सोए ग्रामीण

    जब पहली बार गांव में बिजली जली, तो वह दृश्य भावुक कर देने वाला था। गांव के बुजुर्गों और बच्चों के चेहरे पर छाई मुस्कान उस लंबी प्रतीक्षा के खत्म होने का प्रमाण थी। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस ऐतिहासिक पल की खुशी के कारण रात भर सो नहीं सके। उनके लिए यह किसी त्यौहार से कम नहीं था।

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