चने की खरीद सुनिश्चित करने की मांग, किसानों की महापंचायत ने केंद्र को सौंपा ज्ञापन
जयपुर। किसानों की “किसानों के लिए, किसानों द्वारा” आयोजित किसान महापंचायत के तहत चने की फसल की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करने को लेकर केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में किसानों की आय, बाजार व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया है।
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को संबोधित करते हुए ज्ञापन में कहा कि “किसान की खुशहाली के बिना आजादी अधूरी है” और “खुशहाली के दो आयाम- खेत को पानी, फसल को दाम” को आधार बनाते हुए किसानों के हित में तत्काल निर्णय आवश्यक हैं।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का हवाला
ज्ञापन में बताया गया कि केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2025 को ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की शुरुआत की थी, जिसके तहत 11,440 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया। इस मिशन का उद्देश्य देश में दालों के उत्पादन को बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
चने की खरीद पर उठे सवाल
किसानों ने आरोप लगाया कि योजना के तहत चने की खरीद में कई स्तरों पर सीमाएं लगाई जा रही हैं। राजस्थान में 5000 से अधिक किसानों का पंजीकरण होने के बावजूद खरीद केवल सीमित मात्रा (40 क्विंटल) तक ही की जा रही है, जिससे किसानों को शेष फसल बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
ज्ञापन में कहा गया कि चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है, जबकि बाजार में यह 5000 से 5200 रुपये तक बिक रहा है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल 700 से 800 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
खरीद केंद्र बढ़ाने की मांग
किसान महापंचायत ने मांग की है कि प्रत्येक ग्राम सेवा सहकारी समिति पर खरीद केंद्र स्थापित किए जाएं और सभी पंजीकृत किसानों से बिना किसी सीमा के चने की खरीद की जाए। साथ ही जिन किसानों को MSP से कम दाम पर फसल बेचनी पड़ी है, उन्हें ‘मूल्य घाटा भुगतान योजना’ के तहत मुआवजा दिया जाए।
नीतिगत प्रतिबंधों पर जताई नाराजगी
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व में लागू 25% खरीद सीमा जैसे प्रतिबंधों का किसानों ने लगातार विरोध किया है। इन प्रतिबंधों को हटाने में देरी से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है।
केंद्र सरकार से की गई अपील
किसान महापंचायत ने केंद्र सरकार से मांग की है कि चने की “दाने-दाने की खरीद” सुनिश्चित की जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पूरी फसल खरीदने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
ज्ञापन के अंत में राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि यदि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिला तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
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