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पांच राज्यों के चुनावों में अलवर की रही बड़ी भूमिका
प्रेम पाठक, अलवर. पश्चिम बंगाल, असम समेत चार राज्य एवं एक केन्द्र शासित प्रदेश के राजनीतिक भविष्य का फैसला सोमवार को हो गया। लेकिन ये चुनाव परिणाम कई राजनेताओं का राजनीतिक भविष्य भी लिख गया। इन चुनाव में पश्चिम बंगाल में न केवल भाजपा ने चौंकाने वाली जीत दर्ज कराई, बल्कि बंगाल के चुनाव परिणाम में अलवर के सांसद एवं केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव का राजनीतिक जादू सिर चढ़कर बोला। लेकिन असम के विधानसभा चुनाव में अलवर के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेन्द्र सिंह की चुनावी चाय नहीं उबल पाई और कांग्रेस को बड़ी हार झेलनी पड़ी। गत अप्रेल में सम्पन्न् हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अलवर की राजनीतिक भूमिका अहम रही। कारण है भाजपा के चुनाव प्रभारी होने के कारण अलवर के सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बनाई रणनीति रंग लाई और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी के डेढ़ दशक के चुनावी विजय रथ के पहिए थामने में सफल रहे। हालांकि असम में प्रदेश संगठन महासचिव का जिम्मा संभाल रहे अलवर के पूर्व सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह एक दशक की मेहनत के बाद भी असम में कांग्रेस को पुनर्जीवित कर सत्ता में वापसी कराने में विफल रहे।
राजस्थान में भले ही अभी चुनावी माहौल नहीं हो, लेकिन सोमवार को अलवर देश की राजनीति के केन्द्र में रहा। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम एवं पुंडूचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजे इस दिन घोषित किए गए। हालांकि विधानसभा चुनाव पांच राज्यों में हुए, लेकिन पूरे देश की नजरें पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर टिकी थी। इसका कारण पश्चिम बंगाल में भाजपा का अब तक अपनी सरकार नहीं बना पाना रहा। भाजपा गत एक दशक से पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने के प्रयास में जुटी थी। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा बंगाल में अपने विधायकों की संख्या 3 से बढ़ाकर 77 तक पहुंचाने में कामयाब रही, लेकिन सत्ता पर काबिज होने का सपना अधूरा ही रहा। वहीं लगातार 15 साल से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार होने से भाजपा के लिए यह राज्य राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गया था। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व ने इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने और भाजपा की जीत का परचम फहराने का जिम्मा पार्टी के प्रमुख नेता एवं अलवर के सांसद और केन्द्र सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव को सौंपा।
बंगाल के लिए भूपेन्द्र यादव ही क्यूं
भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव पर ही भरोसा जताया। कारण है कि पूर्व में भूपेन्द्र यादव चुनाव प्रभारी रहते उड़ीसा में पहली बार भाजपा की सरकार बनवाने में सफल रहे। वहीं कई अन्य राज्यों के चुनावों में भूपेन्द्र यादव की चुनावी रणनीति कारगर रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा अब तक सत्ता पर काबिज नहीं हो सकी है और इस बार पहली बार वह बंगाल में सत्ता हासिल करने के लिए प्रयासरत है। इस सपने को साकार करने के लिए भाजपा ने पश्चिम बंगाल का जिम्मा अलवर के भाजपा सांसद भूपेन्द्र यादव को सौंपी और उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल का परिचय देते हुए इस बार विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भगवा फहरा दिया। यादव की चुनावी रणनीति का ही नतीजा रहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की 294 सीटों में भाजपा को 200 के पास पहुंचा दिया और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी को 100 सीटों के नीचे रहने को मजबूर कर दिया।
हार के भंवर में फंसे असम में नहीं चली रणनीति
पश्चिम बंगाल के साथ ही असम के विधानसभा चुनाव का भी अलवर की राजनीति से सीधा जुड़ाव रहा। कांग्रेस ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं अलवर के पूर्व सांसद भंवर जितेन्द्र सिंह को असम प्रदेश के लिए संगठन महासचिव का जिम्मा दिया हुआ है। वे करीब एक दशक से यह जिम्मा संभाल रहे हैं। असम में पिछले 10 साल से भाजपा की सरकार है और इस बार कांग्रेस का प्रयास वहां सत्ता की वापसी था। इसके लिए प्रदेश संगठन महासचिव एवं अलवर की राजनीति से जुड़े भंवर जितेन्द्र सिंह को असम में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने एवं चुनावी रणनीति बनाने का लगातार दूसरी बार जिम्मा सौंपा गया। लेकिन असम विधानसभा चुनाव के घोषित नतीजों में कांग्रेस की यह आस िफर अधूरी रह गई। लगातार तीसरी बार कांग्रेस को असम में हार का स्वाद चखने को मजबूर होना पड़ा है। इतना नहीं इस बार असम में कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव से भी करारी हार झेलनी पड़ी है, यहां कांग्रेस 20 के आसपास अटकी रही और भाजपा 100 के आंकड़े को पार करती दिखाई दी। असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं। हालांकि पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को कांग्रेस में पूर्व भी कई राज्यों में चुनाव के मौके पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा चुकी है, लेकिन ज्यादातर राज्यों में चुनावी परिणाम कांग्रेस के सुखद नहीं रह पाए।
अलवर से जुड़े दोनों नेता राष्ट्रीय नेतृत्व के हैं नजदीक
राष्ट्रीय राजनीति में अलवर से जुूड़े दोनों नेता अपने— अपने राजनीतिक दल के नेतृत्व के नजदीक माने जाते हैं। इनमें अलवर सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कोर ग्रुप के सदस्य रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें मंत्रिमंडल में अहम पद दिए जाने से लेकर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जाती रही है। इसी प्रकार अलवर के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र सिंह भी सोनिया गांधी व राहुल गांधी की टीम के सदस्य रहे हैं। अपने— अपने दलों में टॉप लीडरशिप से नजदीकी के कारण ही उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में अलग— अलग जिम्मेदारी मिलती रही है।



