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    ‘LoC के पार कोई ठिकाना सुरक्षित नहीं’, आतंक पर सेना की दो टूक चेतावनी

    जयपुर: भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने सीमा पार पनप रहे आतंकी ढांचे को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि नियंत्रण रेखा के पार मौजूद किसी भी आतंकी लॉन्च पैड या कैंप को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सीमा पार सक्रिय आतंकी ठिकानों और उनके सहयोगियों की सटीक पहचान कर ली है। सेना इन गतिविधियों पर लगातार और पैनी नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से पहले ही प्रभावी कदम उठाए जा सकें। सामरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशिष्ट स्थानों के नाम साझा न करते हुए उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना हर उस केंद्र पर नजर रख रही है जो भारत की शांति भंग करने का प्रयास कर सकता है।

    नई रणनीति और कार्रवाई का बदलता स्वरूप

    भारतीय सेना के दृष्टिकोण में आए बदलाव पर चर्चा करते हुए सैन्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के विरुद्ध अब भारत की कार्रवाई का समय, स्थान और तरीका पूरी तरह से स्वयं भारत ही तय करेगा। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सेना अब दुश्मन के ठिकानों में गहराई तक जाकर प्रहार करने की पूर्ण क्षमता रखती है और यह नया सामरिक दृष्टिकोण अब देश की सैन्य कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री के पिछले बयानों का संदर्भ देते हुए उन्होंने दोहराया कि सीमाओं के पार अब कोई भी ऐसा स्थान नहीं बचा है जिसे आतंकी अपने लिए सुरक्षित पनाहगाह समझ सकें। यह स्पष्ट संदेश उन ताकतों के लिए है जो सीमा पार से अस्थिरता फैलाने का सपना देखते हैं, क्योंकि भारतीय सेना अब जवाब देने के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।

    आतंकी कैंपों की स्थिति और पड़ोसी देशों का गठजोड़

    आतंकी संगठनों की बदलती रणनीतियों पर नजर डालते हुए सैन्य नेतृत्व ने बताया कि वर्तमान में कई कैंपों को सुरक्षा के डर से अधिक अंदरूनी और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है। हालांकि, भारतीय सेना का मानना है कि केवल स्थान बदल लेने से वे भारत की पहुंच से बाहर नहीं हो जाएंगे क्योंकि निगरानी तंत्र अब पहले से कहीं अधिक आधुनिक और व्यापक हो चुका है। चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य साजो-सामान में चीन की बड़ी हिस्सेदारी एक जगजाहिर तथ्य है। भारत अपनी सीमाओं पर एक साथ कई विरोधियों से मिलने वाली चुनौतियों के लिए हर स्तर पर तैयार है और किसी भी विदेशी टीम या गठजोड़ का सामना करने के लिए सेना के पास पर्याप्त सामर्थ्य और साहस मौजूद है।

    भविष्य की चुनौतियां और सेना का सुदृढ़ीकरण

    भारतीय सशस्त्र बल अपनी क्षमताओं को एकीकृत तरीके से विकसित कर रहे हैं ताकि भविष्य की किसी भी सुरक्षा चुनौती का डटकर मुकाबला किया जा सके। लेफ्टिनेंट जनरल ने विश्वास दिलाया कि पिछले अनुभवों से मिली सीख को सेना ने पूरी तरह आत्मसात कर लिया है और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत और सटीक बनाया गया है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा करने का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों में सुरक्षा के प्रति विश्वास पैदा करना है। सेना का वर्तमान ढांचा न केवल मौजूदा खतरों को बेअसर करने में सक्षम है बल्कि वह बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में भी निरंतर अग्रसर है, जिससे भारत की संप्रभुता अक्षुण्ण बनी रहे।

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