नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की बगावत के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर मचे घमासान ने अरविंद केजरीवाल की चिंता बढ़ा दी है। पंजाब विधानसभा चुनाव में अब महज 10 महीने का समय शेष है, जिसे देखते हुए केजरीवाल ने पंजाब के विधायकों को 'अलर्ट मोड' पर रहने का निर्देश दिया है। दिल्ली की हार और राघव चड्ढा के पाला बदलने को केजरीवाल एक बड़े झटके के रूप में देख रहे हैं। पंजाब के विधायकों के साथ हुई बैठक में उन्होंने बंगाल के चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए आशंका जताई कि अगर समय रहते संगठन को नहीं संभाला गया, तो पंजाब में भी स्थिति हाथ से निकल सकती है।
संगठन के भीतर दरार और नेतृत्व पर सवाल
पार्टी के भीतर से आ रही खबरें बताती हैं कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक के जाने के बाद विधायकों और कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की खाई गहरी हो गई है। विधायकों का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व और जमीनी स्तर के नेताओं के बीच संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है। कई विधायकों ने खुलकर शिकायत की है कि उनके पास अपनी बात रखने के लिए कोई उचित मंच नहीं है और लीडरशिप को धरातल की वास्तविकताओं की पूरी जानकारी नहीं है। कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भी भारी निराशा है कि सरकार बनने के बाद पुराने वालंटियर्स को किनारे कर दूसरे दलों से आए नेताओं को तवज्जो दी गई, जिससे संगठन की नींव कमजोर हुई है।
चड्ढा-पाठक एपिसोड और 'लक्ष्मण रेखा' का उल्लंघन
राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का भाजपा में शामिल होना आम आदमी पार्टी के लिए केवल संख्या बल का नुकसान नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक झटका भी है। पंजाब की राजनीति और संगठन पर राघव चड्ढा और संदीप पाठक की मजबूत पकड़ मानी जाती थी। उनके जाने के बाद अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मिलकर इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केजरीवाल द्वारा तय की गई 'लक्ष्मण रेखा' को लांघने का यह सिलसिला आने वाले समय में पंजाब सरकार की स्थिरता के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है, जिसका असर चुनाव से पहले भी देखने को मिल सकता है।
पंजाब में नया नेतृत्व और भविष्य की चुनौतियां
पंजाब में असंतोष की एक बड़ी वजह मनीष सिसोदिया को राज्य का प्रभारी बनाया जाना भी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, संदीप पाठक को प्रभारी पद से हटाकर सिसोदिया को जिम्मेदारी देना विवाद की जड़ बना, जिससे पाठक और चड्ढा गुट नाराज हो गया। विधायकों का मानना है कि संगठन की पृष्ठभूमि वाले नेताओं की अनदेखी करना पार्टी पर भारी पड़ रहा है। एक तरफ केजरीवाल दिल्ली में अधूरे रहे वादों—जैसे यमुना की सफाई और साफ पानी—को लेकर आत्ममंथन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें पंजाब में बिखरते कुनबे को एकजुट रखने की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।


