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    Homeदेशमीडिया ट्रायल पर भड़के ओवैसी, निदा खान केस को लेकर उठाए सवाल

    मीडिया ट्रायल पर भड़के ओवैसी, निदा खान केस को लेकर उठाए सवाल

    निदा खान मामले में ओवैसी का पलटवार: बोले- एआईएमआईएम को घसीटना गलत, अदालत में साबित होगी बेगुनाही

    छत्रपति संभाजीनगर: एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को टीसीएस (TCS) विवाद की मुख्य आरोपी निदा खान के मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और इसे जबरन जोड़ना राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने विश्वास जताया कि निदा खान अदालत में निर्दोष साबित होंगी।

    एआईएमआईएम के खिलाफ जांच की मांग पर दी प्रतिक्रिया

    नासिक पुलिस द्वारा निदा खान की गिरफ्तारी और एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल पर शरण देने के आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्ताधारी महायुति गठबंधन के नेताओं, विशेषकर मंत्री संजय शिरसात और नितेश राणे ने इस मामले में एआईएमआईएम के खिलाफ कड़ी जांच की मांग की है।

    इस पर ओवैसी ने कहा कि निदा खान को 'मीडिया ट्रायल' का निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि एफआईआर दर्ज होने से बहुत पहले ही निदा का तबादला हो चुका था। ओवैसी ने टीसीएस के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि संबंधित कर्मचारी का एचआर (HR) विभाग से कोई सीधा संबंध नहीं है।


    'धार्मिक किताबें रखना अपराध नहीं'

    ओवैसी ने जांच के दौरान मिली वस्तुओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, "क्या बुर्का पहनना या पैगंबर मोहम्मद साहब पर लिखी किताब घर में रखना गैरकानूनी है? यह तो हर मुस्लिम घर में मिल सकती है।" उन्होंने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी मिर्जा गालिब की किताबें मिलने पर निर्दोष युवकों को परेशान किया गया था।

    उन्होंने आगे कहा, "अगर मीडिया ही जज और जूरी की तरह काम करने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। यह मामला अदालत में नहीं टिक पाएगा क्योंकि यह मुस्लिम समुदाय के शिक्षित लोगों को परेशान करने और नफरत फैलाने के इरादे से रचा गया है।"


    महाराष्ट्र चुनाव के लिए 'डिजिटल' तैयारी

    राज्य में आगामी मतदाता सूची संशोधन (SIR) के संबंध में ओवैसी ने बताया कि उनकी पार्टी एक विशेष ऐप विकसित कर रही है।

    • रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण: इस ऐप में महाराष्ट्र के सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों का साल 2002 से 2024 तक का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।

    • सहायता केंद्र: जहां भी पार्टी की इकाइयां सक्रिय हैं, वहां लोगों की मदद के लिए सहायता केंद्र बनाए जाएंगे।

    • मैपिंग: कई क्षेत्रों में डेटा मैपिंग का काम पूरा हो चुका है। ओवैसी ने बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने की गड़बड़ी को रोकने के लिए उनकी पार्टी पूरी सावधानी बरत रही है।

    उन्होंने दोहराया कि न्यायपालिका अपनी भूमिका निभाएगी और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने महाराष्ट्र की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है।

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