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    असम में सत्ता की कमान फिर हिमंत के हाथ, राज्यपाल से की मुलाकात

    गुवाहाटी : असम की राजनीति में एक बार फिर डॉ. हिमंत बिस्व सरमा का वर्चस्व स्थापित हो गया है, क्योंकि उन्हें सर्वसम्मति से भाजपा और एनडीए विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। रविवार को गुवाहाटी में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद अब उनके लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। आगामी 12 मई को आयोजित होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में वे पद की शपथ लेंगे, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस चुनाव के साथ ही राज्य में नई सरकार के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

    सर्वसम्मति से हुआ नेतृत्व का फैसला

    विधायक दल की इस अहम बैठक में हिमंत बिस्व सरमा के नाम का प्रस्ताव भाजपा के आठ विधायकों द्वारा रखा गया, जिसे बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लिया गया। इस पूरी चयन प्रक्रिया की निगरानी के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे। न केवल भाजपा, बल्कि गठबंधन के सहयोगी दलों असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने भी सरमा के नेतृत्व पर अपना पूरा भरोसा जताया। सभी सहयोगियों की एकजुटता ने यह साफ कर दिया कि गठबंधन के भीतर सरमा की स्वीकार्यता बेहद मजबूत है।

    राजभवन में सरकार बनाने का दावा पेश

    नेता चुने जाने के तुरंत बाद डॉ. सरमा एनडीए के वरिष्ठ नेताओं के साथ लोक भवन पहुंचे और राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने एनडीए की ओर से नई सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया और विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा। राज्यपाल से हुई इस चर्चा के बाद राज्य में प्रशासनिक स्तर पर शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यह मुलाकात असम में एक स्थिर और बहुमत वाली सरकार के अगले कार्यकाल की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक बनी।

    ऐतिहासिक जीत के साथ सत्ता में वापसी

    असम विधानसभा चुनावों के परिणामों ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की लोकप्रियता पर मुहर लगा दी है, जहां एनडीए ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है। 126 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने अपने दम पर 82 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई है, जबकि सहयोगी दलों ने भी 10-10 सीटों पर विजय प्राप्त कर गठबंधन को मजबूती प्रदान की। इस शानदार चुनावी प्रदर्शन ने न केवल विपक्ष को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि आगामी पांच वर्षों के लिए राज्य के विकास और प्रशासनिक नीतियों की दिशा भी तय कर दी है।

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