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    बंगाल के बाद अब पंजाब पर बीजेपी की नजर, नशा और भ्रष्टाचार बने बड़े मुद्दे

    चंडीगढ़। पश्चिम बंगाल में शून्य से शिखर तक का सफर तय करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी पंजाब के सियासी रण में 'बंगाल फॉर्मूला' दोहराने की तैयारी में है। राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वर्तमान में आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं, जहाँ सात राज्यसभा सांसदों के पाला बदलकर बीजेपी में शामिल होने और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता ने पार्टी के भीतर गुटबाजी को हवा दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि यदि विधायकों की एकजुटता डगमगाई, तो आप के लिए पंजाब की सत्ता बचाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

    संगठनात्मक सेंधमारी और दलबदल की राजनीति

    बीजेपी ने पंजाब में अपने आधार को मजबूत करने के लिए विपक्षी खेमे के रणनीतिकारों को ही अपना हथियार बनाया है। हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों, जिनमें राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, का बीजेपी में विलय होना 'आप' के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। बीजेपी इन नेताओं के माध्यम से पंजाब के ग्रामीण और शहरी इलाकों में आप के संगठनात्मक ढांचे को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। इन नेताओं द्वारा अपनी पूर्व पार्टी पर किए जा रहे तीखे हमलों ने जनता के बीच आप की छवि और पार्टी की अंदरूनी एकता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

    कानून-व्यवस्था और वादों की अधूरी जमीन

    पंजाब की राजनीति में बीजेपी ने अब स्थानीय मुद्दों पर अपनी आक्रामक घेराबंदी शुरू कर दी है। पार्टी का सीधा आरोप है कि भगवंत मान सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है। इसके साथ ही, राज्य में नशे की बढ़ती समस्या और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को भी बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है। हाल ही में अमृतसर और जालंधर में हुए विस्फोटों ने सुरक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है, जहाँ विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का तर्क है कि जिस तरह बंगाल में भ्रष्टाचार और सुरक्षा के मुद्दों ने जनता का रुख बदला, वही स्थिति पंजाब में भी बन रही है, खासकर उन महिलाओं के बीच जिनसे किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं।

    पुराने सहयोगियों और नए समीकरणों की तलाश

    किसान आंदोलन और कृषि कानूनों के चलते शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और बीजेपी का सालों पुराना गठबंधन टूट गया था, लेकिन अब बदलते समीकरणों के बीच फिर से दोनों दलों के साथ आने की सुगबुगाहट तेज है। हालांकि, वर्तमान में दोनों दल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आप और कांग्रेस को कड़ी चुनौती देने के लिए पर्दे के पीछे गठबंधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण पंजाब में अपनी पैठ बनाना है, जहाँ कृषि कानूनों के कारण पार्टी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। अब देखना यह होगा कि क्या बीजेपी बंगाल की तरह पंजाब में भी मुख्य विपक्षी दल से सीधे सत्ता के दावेदार तक का सफर तय कर पाती है।

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