विरोध प्रदर्शन के तहत गांवों में MSP आदेश की प्रतियां जलाने का आह्वान
नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने वर्ष 2026-27 की खरीफ फसलों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को किसानों के साथ बड़ा विश्वासघात बताते हुए केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की है। संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने किसानों से किए गए वादों को तोड़ते हुए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार C2+50 प्रतिशत की दर से MSP लागू नहीं किया और किसानों को व्यापक आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि भाजपा ने वर्ष 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में किसानों को व्यापक उत्पादन लागत यानी C2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर MSP देने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में MSP की गणना A2+FL लागत के आधार पर की जा रही है, जो वास्तविक लागत से काफी कम है। संगठन के अनुसार इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसानों को 3 लाख करोड़ रुपये नुकसान होने का दावा
मोर्चा के अनुसार धान का MSP 2441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि C2+50 प्रतिशत के फार्मूले के अनुसार यह 3243 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था। इस तरह किसानों को प्रति क्विंटल करीब 802 रुपये का नुकसान हो रहा है। संगठन ने दावा किया कि केवल 20 खरीफ फसलों पर किसानों को लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के पास पर्याप्त खरीद व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान MSP से भी कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर होंगे, जिससे वास्तविक नुकसान कई गुना बढ़ जाएगा।
WTO और अमेरिकी दबाव के सामने झुकने का आरोप
संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी साम्राज्यवाद और WTO के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि सरकार सब्सिडी को “मार्केट डिस्टॉर्शन” मानने वाली नीतियों को स्वीकार कर रही है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यवस्था कमजोर हो रही है।
मोर्चा ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) पर भी गंभीर आरोप लगाए। संगठन के अनुसार आयोग आज भी पुराने आंकड़ों के आधार पर लागत का अनुमान लगा रहा है, जबकि किसानों की वास्तविक लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, उर्वरक, डीजल, बिजली, सिंचाई और मजदूरी की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद MSP उसी अनुपात में नहीं बढ़ाया जा रहा।
किसानों और मजदूरों की आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाया
मोर्चा ने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2014 में किसानों और खेत मजदूरों की आत्महत्याओं का दैनिक औसत 77 था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 173 प्रतिदिन हो गया है। संगठन ने इसे गहराते कृषि संकट का गंभीर संकेत बताया।
मोर्चा का कहना है कि किसानों को लाभकारी मूल्य और कर्जमाफी नहीं मिलने के कारण संकट लगातार बढ़ रहा है। संगठन ने मांग की कि MSP को व्यापक उत्पादन लागत का डेढ़ गुना घोषित किया जाए और भूमिहीनों, गरीब किसानों, मध्यम किसानों तथा बटाईदार किसानों के लिए पूर्ण कर्जमाफी लागू की जाए।
27 से 31 मई तक गांवों में होगा विरोध प्रदर्शन
संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने सभी घटक संगठनों और किसान समुदाय से अपील की है कि वे 27 से 31 मई 2026 के बीच गांवों में MSP आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करें। संगठन ने कहा कि यह आंदोलन किसानों के अधिकारों और देश की खाद्य संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी है।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एक ओर विदेशी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोल रही है और दूसरी ओर भारतीय किसानों को राहत देने वाली नीतियों से पीछे हट रही है। संगठन ने इसे किसान और मेहनतकश विरोधी नीति बताते हुए बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा की है।
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