पर्यावरण संरक्षण एनजीटी की रोक: 120 साल पुराने पेड़ों और वन्यजीवों को मिली राहत
जयपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने ऐतिहासिक कोटा चिड़ियाघर की भूमि पर प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण पर रोक लगा दी है। अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत आवश्यक अनुमति के बिना न तो निर्माण कार्य किया जा सकेगा और न ही किसी प्रकार की पेड़ों की कटाई की जाएगी।
यह आदेश पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया गया। याचिका में कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा चिड़ियाघर की करीब 2.2 हेक्टेयर वनभूमि पर “स्पोर्ट्स सिटी” विकसित करने की योजना को चुनौती दी गई थी।
याचिका में बताया गया कि वर्ष 1905 में स्थापित यह चिड़ियाघर शहर के लिए एक प्राकृतिक “ऑक्सीजन चैंबर” की भूमिका निभाता है। यहां 120 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ मौजूद हैं, जो पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निरीक्षण समिति की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में हॉर्नबिल, बुलबुल सहित 40 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा मगरमच्छ, घड़ियाल और अजगर जैसे संरक्षित वन्यजीव भी यहां निवास करते हैं। क्षेत्र में कल्पवृक्ष और बटुक आमला जैसे दुर्लभ वृक्ष भी मौजूद हैं।
एनजीटी ने अपने आदेश में “सतत विकास” और “पब्लिक ट्रस्ट सिद्धांत” का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सरकार की जिम्मेदारी है। अधिकरण ने राज्य सरकार और कोटा विकास प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं कि स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए वैकल्पिक या बंजर भूमि का चयन किया जाए, ताकि शहरी वन और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे शहरी हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसे फैसले आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत बचाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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