लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में नए और प्रोन्नत मंत्रियों के विभागों के आधिकारिक आवंटन के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम अटकलों और कयासों पर पूरी तरह विराम लग गया है। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के इस नए वितरण ने साफ कर दिया है कि सरकार के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूरी तरह दबदबा कायम है। पिछले कई दिनों से यह कयास लगाए जा रहे थे कि नए मंत्रियों के चेहरों की तरह उनके विभागों का फैसला भी दिल्ली आलाकमान द्वारा ही तय किया जाएगा और मुख्यमंत्री के पास मौजूद कुछ बड़े विभागों को नए मंत्रियों को सौंप दिया जाएगा। हालांकि, रविवार को जारी हुई आधिकारिक सूची ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए यह साबित कर दिया कि मंत्रियों को मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपने में सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री की मर्जी चली है, जिसमें उन्होंने बिना किसी बाहरी दबाव के अपनी प्रशासनिक पकड़ का मजबूत संदेश दिया है।
मनोज पांडेय को मिला सबसे बड़ा इनाम, दयालु मिश्रा के कद में भारी कटौती
इस पूरे फेरबदल और मंत्रियों की नई फेहरिस्त में सबसे बड़ा राजनैतिक फायदा समाजवादी पार्टी (सपा) से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए कद्दावर ब्राह्मण नेता मनोज कुमार पांडेय को हुआ है। मुख्यमंत्री ने उन्हें सीधे जनता की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा 'खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति' जैसा भारी-भरकम और बेहद महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंप दिया है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी राज्य में ब्राह्मण समुदाय के भीतर चल रही कथित नाराजगी को दूर करने और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश में जुटी थी; ऐसे में मनोज पांडेय को इतना कद्दावर विभाग देकर सरकार ने उनका राजनीतिक कद काफी बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले से वाराणसी (बनारस) के कद्दावर नेता दयाशंकर मिश्र 'दयाल' को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि यह महत्वपूर्ण मंत्रालय पहले उन्हीं के पास था। अब दयालु मिश्रा से खाद्य एवं रसद विभाग वापस ले लिया गया है और वे सरकार में सिर्फ आयुष विभाग के ही मंत्री बने रहेंगे।
भूपेंद्र चौधरी को मिला MSME, राकेश सचान के राजनैतिक रसूख को लगा झटका
मंत्रिमंडल में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि उन्हें लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसा अति-महत्वपूर्ण मंत्रालय मिल सकता है। हालांकि, उन्हें अंततः सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय की जिम्मेदारी से ही संतोष करना पड़ा। प्रदेश में युवाओं और स्थानीय उद्योगों से सीधे जुड़े होने और कई बड़ी स्वरोजगार योजनाओं के संचालन के कारण प्रशासनिक लिहाज से यह विभाग भी बेहद अहम और सरकार की प्राथमिकताओं वाला माना जाता है। भूपेंद्र चौधरी को इस महत्वपूर्ण विभाग की कमान मिलने से वर्तमान मंत्री राकेश सचान के रसूख को बड़ा झटका लगा है। पहले एमएसएमई (MSME) विभाग पूरी तरह राकेश सचान के अधीन था, लेकिन अब उनके पास केवल खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम और हथकरघा उद्योग विभाग ही रह गए हैं, जिसके कारण सरकार के भीतर उनका कद पहले के मुकाबले कम आंका जा रहा है।
स्वतंत्र प्रभार और राज्यमंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल
मुख्यमंत्री ने केवल कैबिनेट मंत्रियों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी अपनी रणनीति के तहत बदलाव किए हैं। प्रमोट होकर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने सोमेंद्र तोमर को इस बार राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल (PRD) का जिम्मा सौंपा गया है, जबकि इससे पहले वे बतौर राज्यमंत्री ऊर्जा जैसे भारी-भरकम विभाग का काम देख रहे थे। उनके साथ ही स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का जिम्मा मिला है। नवनियुक्त राज्यमंत्रियों की बात करें, तो कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्रालय से संबद्ध किया गया है, जबकि कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और सुरेंद्र दिलेर को महत्वपूर्ण राजस्व विभाग की जिम्मेदारी मिली है। इसके अतिरिक्त, वाराणसी क्षेत्र से आने वाले हंस राज विश्वकर्मा को कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में राज्यमंत्री के तौर पर तैनात किया गया है, जिससे यह साफ संदेश जाता है कि मुख्यमंत्री ने हर क्षेत्र और वर्ग को साधते हुए अपनी टीम को नए सिरे से तैयार किया है।


