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    पीएम विश्वकर्मा योजना से बदल रही कारीगरों की जिंदगी, प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक सहायता

    विश्वकर्माओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार की बड़ी पहल, प्रशिक्षण, ऋण और आधुनिक उपकरणों का मिल रहा लाभ

    अलवर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के एमएसएमई मंत्रालय द्वारा संचालित पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। सितंबर 2023 से शुरू की गई इस योजना के माध्यम से पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, ऋण सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

    प्रदेश में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई, राजमिस्त्री, मूर्तिकार सहित विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को लाभान्वित किया जा रहा है।

    योजना का उद्देश्य

    पीएम विश्वकर्मा योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को पहचान दिलाना, उनके कौशल को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत प्रशिक्षण, टूलकिट सहायता, कोलेटरल मुक्त ऋण, डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और विपणन सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    योजना के तहत मिलने वाले प्रमुख लाभ

    योजना के अंतर्गत पात्र कारीगरों को प्रमाण पत्र एवं पहचान पत्र प्रदान किया जाता है। कौशल सत्यापन के बाद 5 से 7 दिन का मूलभूत प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि इच्छुक लाभार्थी 15 दिन का उन्नत प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये स्टाइपेंड दिया जाता है।

    कारीगरों को आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए 15 हजार रुपये तक की टूलकिट सहायता भी प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त बिना गारंटी के 1 लाख रुपये तक का ऋण पहली किश्त के रूप में तथा 2 लाख रुपये तक का ऋण दूसरी किश्त के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। लाभार्थियों को मात्र 5 प्रतिशत रियायती ब्याज दर पर ऋण मिलता है।

    योजना के तहत डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। साथ ही ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स लिंक, व्यापार मेलों एवं प्रचार गतिविधियों के माध्यम से बाजार सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

    कौन कर सकता है आवेदन

    योजना के तहत 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगर आवेदन कर सकते हैं। इनमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, राजमिस्त्री, दर्जी, धोबी, नाई, खिलौना निर्माता, मालाकार सहित अन्य पारंपरिक व्यवसाय शामिल हैं।

    आवेदनकर्ता की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना आवश्यक है तथा वह असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार के आधार पर कार्यरत होना चाहिए। सरकारी कर्मचारी एवं उनके परिवार इस योजना के पात्र नहीं होंगे।

    ऐसे करें पंजीकरण

    इच्छुक व्यक्ति पीएम विश्वकर्मा योजना के आधिकारिक पोर्टल
    www.pmvishwakarma.gov.in
    पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

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