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    शुभेंदु के फैसले पर गरमाई राजनीति, हुमायूं कबीर ने उठाए तीखे सवाल

    कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नवगठित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार द्वारा बकरीद के मद्देनजर पशु वध और उनकी बलि को लेकर जारी किए गए एक नए सरकारी आदेश ने राज्य की सियासी सरगर्मी को पूरी तरह बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने त्योहार से ठीक पहले पशु वध अधिनियम को कड़ाई से लागू करने और सार्वजनिक स्थानों पर बलि देने पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    हुमायूं कबीर ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

    नवनिर्वाचित आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने भाजपा सरकार के इस आदेश पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कुर्बानी से जुड़े इस नए नियम को लेकर सुवेंदु सरकार को सीधे आड़े हाथों लिया और इस फैसले की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। हुमायूं कबीर का कहना है कि धार्मिक रीति-रिवाजों और त्योहारों से ठीक पहले इस तरह के प्रतिबंधात्मक कदम उठाने से जनता के एक बड़े वर्ग में बेवजह भ्रम और नाराजगी का माहौल पैदा हो रहा है, जो कि सही नहीं है।

    विपक्षी दलों का तीखा पलटवार

    प्रशासन के इस कदम को लेकर केवल एजेयूपी ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य विपक्षी दल भी पूरी तरह लामबंद नजर आ रहे हैं। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार सत्ता संभालते ही राज्य के सांप्रदायिक सौहार्द और पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उनका तर्क है कि सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं पर अचानक इस तरह की कानूनी बंदिशें लगाना जनता के संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

    सरकार का रुख और प्रशासनिक दलील

    दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार और भाजपा नेतृत्व ने इस पूरे मामले में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कानून व्यवस्था और नियमों की दुहाई दी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह आदेश किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि पशु क्रूरता निवारण नियमों और सार्वजनिक स्वच्छता को बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है। सरकार का कहना है कि नियमों के दायरे में रहकर निर्धारित स्थानों पर ही धार्मिक गतिविधियां संपन्न की जानी चाहिए, ताकि समाज के किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना न करना पड़े।

    अदालती आदेशों और नियमों का हवाला

    प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात को रेखांकित किया है कि सरकार केवल पूर्व से मौजूद पशु वध अधिनियमों और समय-समय पर आने वाले अदालती दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करवा रही है। इसके तहत सार्वजनिक सड़कों, खुले मैदानों या रिहायशी इलाकों के बीच खुले में पशु वध पर पूरी तरह रोक रहेगी और इसके लिए विशेष तौर पर चिन्हित जगहों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। बहरहाल, बकरीद से ठीक पहले आए इस फैसले ने बंगाल की नई सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की एक नई जमीन तैयार कर दी है।

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