बहादुरगढ़। हरियाणा के बहादुरगढ़ में स्थित मॉडर्न इंडस्ट्रियल एस्टेट (एमआईई) पार्ट-बी के प्लॉट नंबर 2224 में शुक्रवार दोपहर एक भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई है। यहाँ संचालित क्लासिक कोल प्राइवेट लिमिटेड नामक फैक्ट्री में दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक एक बॉयलर जोरदार धमाके के साथ फट गया। बॉयलर ब्लास्ट इतना भयानक था कि इसके तुरंत बाद पूरी फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। धमाके की गूंज से पूरा औद्योगिक क्षेत्र दहल उठा और आस-पास की अन्य फैक्ट्रियों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस कारखाने में मुख्य रूप से फेविकोल (लोशन) बनाने का काम होता था।
ब्लास्ट के प्रभाव से ढहा लेंटर; कारखाने के अंदर मचा हाहाकार
धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री की इमारत का लेंटर (छत) ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर नीचे गिर गया। छत गिरते ही अंदर काम कर रहे श्रमिकों के बीच जान बचाने के लिए चीख-पुकार मच गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के वक्त फैक्ट्री के भीतर लगभग 10 से 12 मजदूर ड्यूटी पर तैनात थे। इसके अलावा, फैक्ट्री के ठीक बाहर काम कर रहे करीब 7 से 8 अन्य लोग भी इस ब्लास्ट की चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं।
मलबे में दबे होने की आशंका; नागरिक अस्पताल में घायल भर्ती
दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए मलबे के नीचे अभी भी कम से कम दो लोगों के फंसे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। वहीं, फैक्ट्री के बाहर घायल हुए सभी 7 से 8 व्यक्तियों को आनन-फानन में एम्बुलेंस की मदद से नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
दमकल की 6 गाड़ियां मौके पर; आग पर काबू पाने की जद्दोजहद जारी
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की 6 गाड़ियों को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। दमकल कर्मी लगातार पानी और फोम की बौछार कर फैक्ट्री में धधक रही आग को शांत करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। केमिकल और फेविकोल होने के कारण आग पर काबू पाने में फायर फाइटर्स को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा; जांच के आदेश जारी
हादसे का संदेश मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का दस्ता भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी (कॉर्डन ऑफ) कर दी है ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए। प्रशासनिक टीमों द्वारा फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य चलाया जा रहा है और इसके साथ ही हादसे के वास्तविक तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।


