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    PMUY लाभार्थियों के लिए बड़ा सवाल, 9 से 4 सिलिंडर होने पर सरकार का स्पष्टीकरण

    नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के अंतर्गत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की सालाना संख्या को नौ से घटाकर चार करने का कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कटौती के पीछे कुछ लाभार्थियों द्वारा योजना का गलत इस्तेमाल किए जाने की प्रामाणिक रिपोर्टें थीं। सरकार के पास उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, एक बड़े वर्ग को साल भर में चार से अधिक सिलेंडरों की वास्तविक आवश्यकता नहीं थी, और अतिरिक्त कोटे का उपयोग घरेलू रसोई के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा था। मंत्री ने सवाल उठाया कि जब जमीनी सर्वे में यह बात साफ हो चुकी है कि अधिकांश परिवारों के लिए चार रिफिल पर्याप्त हैं, तो उससे अधिक सब्सिडी वाले सिलेंडर जारी रखने का कोई तार्किक आधार नहीं रह जाता है।

    सब्सिडी के दुरुपयोग पर लगी लगाम और मोदी सरकार के विकास मॉडल की सराहना

    इस निर्णय की पृष्ठभूमि साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार को लगातार विश्वसनीय इनपुट मिल रहे थे कि कई लोग ₹300 की रियायती दर पर मिलने वाले इन सिलेंडरों को लेकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इस प्रकार की कालाबाजारी और व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए ही यह प्रशासनिक सुधार किया गया है। इसके साथ ही, हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन और नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि विपक्ष को इस विकास-केंद्रित दृष्टिकोण का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के मतदाता लगातार भाजपा और मौजूदा सरकार पर इसलिए भरोसा जता रहे हैं क्योंकि कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी बिचौलिये के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रही हैं और धरातल पर उनका शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    फ्लेक्स फ्यूल ई85 की लॉन्चिंग और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक प्रगति

    ऊर्जा क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों पर बात करते हुए पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए विशेष 'ई85 ईंधन' को सफलतापूर्वक बाजार में उतार दिया है। अब ऑटोमोबाइल उद्योग और 'सियाम' जैसे प्रमुख संगठनों के साथ मिलकर भविष्य में एथेनॉल आधारित ईंधनों के व्यापक विस्तार पर उच्च स्तरीय चर्चाएं चल रही हैं। भारत ने जैव ईंधन (बायोफ्यूल) के मिश्रण में तय समय-सीमा से काफी पहले ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर इतिहास रचा है। वर्ष 2014 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा मात्र 1.5 प्रतिशत थी, वहीं नवंबर 2022 तक यह बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई थी। सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का जो महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया था, उसे अपनी कुशल नीतियों के बल पर वर्ष 2024 में ही समय से पहले हासिल कर लिया गया है।

    घरेलू ऊर्जा उत्पादन के लिए ₹90,000 करोड़ का आवंटन और टैक्स कटौती से राहत

    देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक रणनीति का उल्लेख करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत घरेलू स्तर पर तेल व गैस की खोज, बायोफ्यूल ब्लेंडिंग और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के विस्तार पर तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 'समुद्र मंथन' परियोजना के तहत नए तेल कुओं की खुदाई और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए ₹90,000 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। ईंधन की कीमतों पर देशव्यापी चर्चा का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2021, मई 2022 और हाल के दिनों में उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में की गई कई कटौतियों तथा भाजपा शासित राज्यों द्वारा वैट (VAT) कम किए जाने के चलते, आज दिल्ली जैसे शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें विगत चार वर्षों की तुलना में काफी नियंत्रित और कम स्तर पर बनी हुई हैं।

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