उदयपुर। राजस्थान के झीलों के शहर उदयपुर के अंतर्गत आने वाले ढीकली गांव में उस समय अचानक अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया, जब आबादी वाले क्षेत्र के एक ठिकाने से सांपों का पूरा कुनबा एक साथ मिलने की हैरतअंगेज खबर सामने आई। इस अनोखी और डरावनी घटना की भनक लगते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। वन्यजीव रेस्क्यू टीम ने बिना समय गंवाए तुरंत मोर्चा संभाला और बेहद सूझबूझ व सुरक्षित तरीके से सभी विषधरों को अपने नियंत्रण में लेकर पास के घने जंगल में आजाद कर दिया। समय रहते हुई इस त्वरित कार्रवाई से जहां एक बड़ा हादसा टल गया, वहीं ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है।
एक ही जगह से मिले 22 सपोले और मादा नागिन
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स और रेस्क्यू टीम ने जब चिन्हित स्थान पर खोजबीन शुरू की, तो वहां का नजारा देखकर हर कोई दंग रह गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुल 23 जहरीले सांप बरामद किए गए, जिनमें 22 छोटे सांप के बच्चे (सपोले) और उनके साथ बैठी उनकी विशालकाय मां शामिल थी। एक ही संकरे स्थान पर इतनी बड़ी तादाद में रेंगते हुए जीवों को देखकर वहां मौजूद ग्रामीणों में खौफ और दहशत का माहौल पैदा हो गया था। रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने एक-एक कर सभी नन्हें सांपों और मादा नागिन को सावधानीपूर्वक विशेष डिब्बों में सुरक्षित बंद किया।
गर्मी और उमस के कारण रिहायशी इलाकों का रुख करते हैं जीव
इतनी बड़ी संख्या में सांपों के एक साथ मिलने के पीछे की वैज्ञानिक वजह बताते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक गर्मी, उमस और आगामी बरसात के मौसम में जमीन के नीचे मौजूद इनके प्राकृतिक बिलों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है या पानी भर जाता है। ऐसे में ये रेंगने वाले जीव अक्सर सुरक्षित, ठंडी और नम जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों व रिहायशी मकानों के कोनों की तरफ पलायन कर जाते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में इस विशेष मौसम के दौरान सांपों के निकलने की घटनाएं अचानक काफी बढ़ जाती हैं।
वन विभाग ने जारी की एडवायजरी और वन्यजीवों को बचाने की अपील
सफलतापूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ढीकली गांव के निवासियों ने जान जोखिम में डालकर उनकी सुरक्षा करने वाली रेस्क्यू टीम की तत्परता और साहस की जमकर सराहना की। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने आम जनता के लिए एक जरूरी एडवायजरी जारी करते हुए अपील की है कि घरों या आसपास सांप दिखने पर लोग कतई घबराएं नहीं और न ही अंधविश्वास में आकर या आत्मरक्षा के नाम पर इन बेजुबान जीवों को नुकसान पहुंचाएं। ऐसे मामलों में तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचित करें ताकि इंसानों और वन्यजीवों दोनों की जान सुरक्षित बचाई जा सके।


