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    गोवा भागने की फिराक में थे आरोपी, महंत हत्याकांड में पुलिस को मिली बड़ी सफलता

    कोटा। राजस्थान के कोटा जिले में स्थित ऐतिहासिक चन्द्रेशल मठ के महंत की नृशंस हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस की जांच तेज हो गई है। कस्टडी में लिए गए मुख्य मास्टरमाइंड वकील संतोष राय और शार्पशूटर पुष्पेंद्र उर्फ प्रिंस से पुलिस मुख्यालय में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। इसी बीच, वारदात को अंजाम देकर फरार हुए मुख्य आरोपी आदित्य वर्मा, उसकी पत्नी जैक्सन जॉर्ज और सहयोगी अंकित बैरवा को पुलिस ने बाहरी राज्य से दबोच लिया है, जिन्हें विशेष टीम आज कोटा लेकर पहुंचेगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आदित्य की पत्नी ने वारदात के बाद साक्ष्य नष्ट करने में अपराधियों की मदद की थी, इसलिए उसे भी सह-आरोपी बनाया गया है। इस पूरे खूनी खेल की मुख्य वजह चन्द्रेसल मठ के आधिपत्य वाली करोड़ों रुपये मूल्य की कीमती जमीन और संपत्ति पर अवैध कब्जा करना था।

    वकील ने तैयार की थी कत्ल की पटकथा

    सिटी एसपी तेजस्वनी गौतम ने मामले का आधिकारिक खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरे हत्याकांड की साजिश की रूपरेखा वकील संतोष राय ने बेहद शातिर तरीके से तैयार की थी। दरअसल, मठ प्रबंधन की नई कार्यकारिणी के गठन से वकील काफी खफा था और ट्रस्ट की अरबों की बेनामी संपत्ति पर उसकी नीयत खराब हो गई थी। अपने इस काले मंसूबे को पूरा करने के लिए उसने अपने ही एक पुराने मुवक्किल (क्लाइंट) आदित्य वर्मा को इस खूनी साजिश में शामिल किया। अधिवक्ता ने बेहद चालाकी से ऐसे चेहरों का चयन किया था, जिन पर स्थानीय पुलिस को आसानी से संदेह न हो सके। इसके बाद उसने एक लाख रुपये की सुपारी (कांट्रैक्ट किलिंग) देकर महंत देवानंद महाराज को रास्ते से हटवा दिया। हालांकि, शव पर किए गए चाकू के निशानों और वार करने के खास तरीके ने पुलिस को स्थानीय अपराधियों (लोकल एंगल) का सुराग दे दिया, जिसके दम पर पुलिस इस पूरे गिरोह तक पहुंच सकी।

    संदेह से बचने के लिए अस्पताल में रचा ढोंग

    जांच में सामने आया है कि हत्या की तारीख मुकर्रर करने से पहले मास्टरमाइंड वकील ने आदित्य और उसके शूटरों से चन्द्रेसल मठ की कई दिनों तक बारीकी से रेकी करवाई थी। खुद को कानून के शिकंजे और किसी भी तरह के शक से दूर रखने के लिए वकील ने एक शातिर चाल चली। वह कत्ल की तय तारीख से ठीक दो दिन पहले अपनी सर्जरी कराने का झूठा बहाना बनाकर जयपुर के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती हो गया ताकि उसके पास पुख्ता 'एलीबाय' (घटनास्थल पर न होने का सबूत) रहे। महंत की हत्या करने के तुरंत बाद सभी शूटर सीधे जयपुर पहुंचे, जहां अस्पताल के पास ही वकील ने सभी को तय वादे के मुताबिक सुपारी की रकम बांट दी, जिसमें से पुष्पेंद्र अपना 30 हजार रुपये का हिस्सा लेकर वापस कोटा लौट आया था।

    वाशिंग मशीन में धोए खून से सने कपड़े

    वारदात को अंजाम देने के बाद कातिल अपनी मोटरसाइकिल से सीधे आरके पुरम स्थित मुख्य आरोपी आदित्य के घर पहुंचे थे। वहां आदित्य की पत्नी जैक्सन जॉर्ज को पूरे हत्याकांड की जानकारी दी गई, जिसने फौरन साक्ष्यों को छुपाने के उद्देश्य से सभी हत्यारों के खून से सने कपड़े वाशिंग मशीन में डालकर धो दिए। इसके बाद आरोपी अंकित बैरवा के घर जाकर छिप गए और सुबह होते ही जयपुर होते हुए दिल्ली भाग निकले। दिल्ली से सभी आरोपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर गोवा में फरारी काटने के लिए रवाना हो गए थे, लेकिन कोटा पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और महाराष्ट्र पुलिस की मदद से उन्हें गोवा पहुंचने से पहले ही रास्ते में दबोच लिया।

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