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    बूंदी में प्रशासनिक हलचल: मंत्री के दौरे के बाद 12 अधिकारियों पर गिरी गाज

    बूंदी। राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के बूंदी क्षेत्र के दौरे के लगभग एक माह बाद राज्य सरकार ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए विकास अधिकारी (बीडीओ) सहित 11 प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन के इस कड़े रुख से पूरे पंचायती राज महकमे और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई के तहत केशवरायपाटन के विकास अधिकारी को सस्पेंड कर उनका मुख्यालय जयपुर निर्धारित किया गया है, जबकि तालेड़ा के विकास अधिकारी को पदस्थापन की प्रतीक्षा (एपीओ) में डालते हुए पंचायती राज विभाग के जयपुर मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, केशवरायपाटन, तालेड़ा और हिंडोली के नोडल अतिरिक्त विकास अधिकारियों तथा सहायक अभियंताओं के खिलाफ 16 सीसीए नियमों के तहत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

    संविदाकर्मियों की सेवाएं समाप्त और प्रशासकों पर गाज

    लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कार्यरत तालेड़ा, केशवरायपाटन और हिंडोली के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर्स की संविदा सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। इसके साथ ही जिला स्तरीय स्वच्छ भारत मिशन कोऑर्डिनेटर पर भी दंडात्मक गाज गिरी है और इन तीनों पंचायत समितियों के समस्त कनिष्ठ तकनीकी सहायकों (जेटीए) को उनके दायित्वों से कार्यमुक्त कर दिया गया है। विकास कार्यों में उदासीनता बरतने के कारण ग्राम पंचायत जमीतपुरा, सुवास, रडी, भीया और धोबड़ा के प्रशासकों को उनके पदों से हटा दिया गया है, जबकि देलूंदा, सिंता, तीरथ, चडी, गुडली और लेसरदा के प्रशासकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस आदेश के तहत 11 ग्राम विकास अधिकारियों (वीडीओ) को भी सस्पेंड कर उनके खिलाफ 16 सीसीए के तहत जांच बिठा दी गई है।

    भ्रष्टाचार की जांच के लिए सात दिनों का अल्टीमेटम

    जिन 11 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों और वित्तीय प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं, वहां के संबंधित अधिकारियों को कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है। इन अधिकारियों को पिछले 3 वर्षों के दौरान क्षेत्र में कराई गई साफ-सफाई और वित्त आयोग से प्राप्त हुए फंड के खर्च का एक-एक पाई का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने इस विस्तृत वित्तीय हिसाब को जमा करने के लिए अधिकारियों को मात्र 7 दिन की मोहलत दी है।

    औचक निरीक्षण में खुली पोल और ऐतिहासिक एक्शन

    इस अभूतपूर्व फेरबदल की पृष्ठभूमि बीती 9 मई को मंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान तैयार हुई थी, जब ग्रामीणों ने उनसे क्षेत्र में फैली गंदगी और विकास योजनाओं में भारी घपले की शिकायत दर्ज कराई थी। जब मंत्री ने स्वयं देलूंदा, तालेड़ा और गुडली सहित कई ग्राम पंचायतों का औचक दौरा किया, तो धरातल पर स्थितियां अत्यंत दयनीय पाई गईं। नालियां पूरी तरह अवरुद्ध थीं, सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के अंबार लगे थे और जिम्मेदार अधिकारी गायब थे। पौधारोपण अभियान की पड़ताल करने पर सामने आया कि हजारों पौधे लगाने के सरकारी दावे सिर्फ कागजों तक सीमित थे और मौके पर अधिकांश पौधे या तो पूरी तरह सूख चुके थे या गायब थे। यहां तक कि एक राजकीय विद्यालय के निरीक्षण में 21 शिक्षकों में से केवल 13 शिक्षक ही ड्यूटी पर उपस्थित मिले। इस निरीक्षण के बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने पूरी तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित की थी, जिसके आधार पर 12 जून 2026 को यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। इसे राज्य के इतिहास में किसी एक जिले के भीतर प्रशासनिक अमले पर की गई अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई माना जा रहा है।

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