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    शाह का ऐलान, अब एक ही शिवसेना; महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़

    मुंबई। महाराष्ट्र के सियासी गलियारे में शिवसेना की विरासत, पहचान और कमान को लेकर जारी अंतहीन खींचतान के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक बयान जारी किया है। कोल्हापुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने दोटूक शब्दों में कहा कि पहले राजनीतिक चर्चाओं में लोगों को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे को 'शिवसेना-शिंदे गुट' कहकर संबोधित करना पड़ता था, परंतु अब परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और राज्य में कोई 'गुट' शेष नहीं बचा है, बल्कि अब सिर्फ और सिर्फ एक ही शिवसेना अस्तित्व में है। गृह मंत्री का यह बड़ा बयान ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब सूबे के सियासी समीकरण तेजी से करवट ले रहे हैं और मूल शिवसेना के अस्तित्व को लेकर वैधानिक व राजनैतिक बहस जारी है। शाह ने अपने इस संबोधन में न केवल शिवसेना के मुद्दे पर रुख साफ किया, बल्कि प्रदेश सरकार के ढांचागत विकास कार्यों और देश में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के एजेंडे को भी जनता के समक्ष मजबूती से रेखांकित किया।

    शिवसेना के विभाजन और भ्रम की स्थिति पर अमित शाह का बड़ा राजनैतिक संदेश

    जनसभा के मंच से बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि एक दौर वह था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले जनसमूह को महज एक धड़े या 'शिंदे गुट' के रूप में देखा और परिभाषित किया जाता था। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि अब वह दौर बीत चुका है और जनता के समर्थन व विधिक प्रक्रियाओं के बाद केवल एक मूल शिवसेना ही धरातल पर काम कर रही है। राजनैतिक विश्लेषक शाह के इस वक्तव्य को आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की आंतरिक सुदृढ़ता के एक बड़े संकेत के तौर पर देख रहे हैं। गृह मंत्री ने इस माध्यम से विपक्षी खेमे को यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि शिवसेना के नाम और निशान को लेकर पैदा किया गया हर प्रकार का संशय या भ्रम अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।

    १५०० करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अंबाबाई कॉरिडोर परियोजना की घोषणा

    अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए अमित शाह ने कोल्हापुर की आराध्य देवी माता अंबाबाई मंदिर के जीर्णोद्धार और वहां बनने वाले भव्य कॉरिडोर निर्माण कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने घोषणा की कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ बड़े पैमाने पर जुटी हुई है। शाह ने जानकारी साझा की कि इस महात्वाकांक्षी अंबाबाई कॉरिडोर परियोजना के क्रियान्वयन पर लगभग १५०० करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि व्यय की जाएगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल हर साल आने वाले लाखों भक्तों की राह सुगम होगी, बल्कि इस पूरे अंचल में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी एक नई गति मिलेगी।

    मोदी सरकार के १२ वर्षों के कार्यकाल को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्वर्ण काल बताया

    केंद्रीय गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पिछले १२ वर्षों के दौरान देश ने ऐसे कई ऐतिहासिक और युगांतकारी कार्यों को हकीकत में बदलते देखा है, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारों में सर्वथा असंभव मान लिया गया था। उन्होंने अयोध्या में निर्मित भव्य राम मंदिर का प्रत्यक्ष उदाहरण देते हुए कहा कि पहले की पीढ़ियां यह सोचती थीं कि शायद वे अपने जीवनकाल में रामलला का मंदिर नहीं देख पाएंगी, परंतु २०१४ में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह ऐतिहासिक सपना साकार हुआ। शाह ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्विकास, सोमनाथ मंदिर के स्वर्ण निर्माण और मां कामाख्या कॉरिडोर का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार 'विकास भी, विरासत भी' के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए देश की सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और भारत को वैश्विक पटल पर एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर अग्रसर है।

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