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    खाटूश्यामजी में बदला बाबा श्याम का स्वरूप, तिलक श्रृंगार के बाद श्याम वर्ण में दे रहे दर्शन

    विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में बाबा श्याम ने अपना स्वरूप बदल लिया है. अब वे श्याम वर्ण में भक्तों को दर्शन देंगे. इस रूप में बाबा श्याम का चंदन से मस्तक पर लेप किया जाता है. मंदिर परम्परा के अनुसार बाबा श्याम एक महीने में दो रूपो में दर्शन देते हैं. एक शालिग्राम, जिसमें वे अपने मूल स्वरूप में नजर आते हैं. भक्तों को ये दर्शन महीने में केवल सात दिन ही करने को मिलते हैं. इसके अलावा दूसरा है श्याम वर्ण इसमें बाबा श्याम करीब 22 से 23 दिन तकदर्शन देते हैं.
    मंदिर कमेटी के अनुसार, अमावस्या पर बाबा श्याम को स्नान करने के बाद श्याम वर्ण का चंदन लेप उतार दिया जाता है. इसके कुछ दिन बाद संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम का फिर से तिलक श्रृंगार किया जाता है. तिलक श्रृंगार के दौरान मंदिर कमेटी द्वारा आधिकारिक रूप से करीब 19 घंटे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रखे जाते हैं. इस दौरान केवल मंदिर के मुख्य पुजारियों संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम के तिलक श्रृंगार का कार्य किया जाता है.
    तिलक श्रृंगार के बाद खुला मंदिर 
    हाल ही में बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार किया गया है. करीब 19 घंटे मंदिर बंद रहने के बाद फिर से पट खुलते ही खाटूश्याम जी मंदिर में जयकारों के साथ श्रद्धालुओं की गूंज सुनाई देने लगी है. भक्त बाबा श्याम के मनमोहक तिलक श्रृंगार छवि के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर कमेटी द्वारा 75 फीट मार्ग पर बनी 14 कतारों में श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन करवाए जा रहे हैं. भक्त दिल्ली, मुंबई, कोलकाता हरियाणा सहित देश के कोने कोने से मनोकामनाएं लेके पहुंच रहे हैं. दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी एवं पुलिस प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए. मंदिर परिसर व दर्शन मार्ग पर पुलिस व कमेटी के सुरक्षा गार्ड्स ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध किया.

    शनिवार और रविवार को दिन में बंद नहीं होगा मंदिर 
    आमतौर, पर दोपहर 2 बजे से लेकर 4 बजे तक खाटूश्याम जी मंदिर बंद रहता है. शनिवार रविवार को वीकेंड होने के कारण भक्तों की संख्या आम दिनों से अधिक रहती है. ऐसे में आज और कल खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट दिन में बंद नहीं होंगे. इसके अलावा एकादशी और द्वादशी को भी दिन और भीड़ अधिक रहने पर रात के समय भी मंदिर खुला रखा जाता है.

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