एक्सप्रेसवे को बताया किसानों के हितों के खिलाफ, दोपहिया रैली, धरना, लाल झंडा अभियान और विशाल प्रदर्शन की बनाई रणनीति
सरगोठ। कोटपूतली से किशनगढ़ तक प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसान महापंचायत ने आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने का फैसला किया है। रींगस के निकट सरगोठ स्थित कान्हा होटल में आयोजित रणनीतिक बैठक में कोटपूतली, पाटन, नीमकाथाना, खंडेला, श्रीमाधोपुर, रींगस, चौमू, रेनवाल, फुलेरा और किशनगढ़ क्षेत्र के प्रमुख किसान प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आगामी संघर्ष की रूपरेखा तैयार की।
बैठक में उपस्थित किसानों ने प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का विरोध करते हुए “जमीन हमारी, रोड तुम्हारी नहीं बनेगी” तथा “जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे” जैसे नारों के साथ आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।
‘यह परियोजना आम जनता नहीं, चुनिंदा पूंजीपतियों के हित में’
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे आम जनता की आवश्यकता नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पक्षपातपूर्ण तरीके से बनाई जा रही ऐसी परियोजनाएं किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था जन, जमीन, जंगल और पशुधन पर आधारित है, जबकि यह परियोजना इन सभी आधारों को प्रभावित करेगी। इससे हजारों किसानों की आजीविका पर संकट आएगा, कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा तथा गांवों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क भी कमजोर पड़ेगा।
15 फीट ऊंचा और 190 मीटर चौड़ा प्रस्तावित कॉरिडोर बना चिंता का कारण
बैठक में किसानों ने बताया कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे लगभग 15 फीट ऊंचाई और करीब 190 मीटर चौड़ाई में बनाया जाना प्रस्तावित है। उनका कहना है कि इससे गांव दो हिस्सों में बंट जाएंगे, खेतों तक पहुंच कठिन होगी तथा ग्रामीणों के दैनिक आवागमन पर भी असर पड़ेगा।
प्रतिनिधियों ने कहा कि परियोजना का मौजूदा स्वरूप किसानों की सहमति के बिना तैयार किया गया है, इसलिए इसका विरोध लगातार जारी रहेगा।
सितंबर से जारी है आंदोलन, कई चरण पूरे
बैठक में बताया गया कि किसान महापंचायत पिछले वर्ष सितंबर से इस परियोजना के विरोध में लगातार संघर्ष कर रही है। इस दौरान कोटपूतली, रेनवाल, श्रीमाधोपुर और नीमकाथाना में ट्रैक्टर रैलियां निकाली गईं। कोटपूतली में तीन दिवसीय धरना, मौन जुलूस, किशनगढ़, नरेना और चिमनपुरा में जागरण सभाएं आयोजित की गईं। इसके अलावा कोटपूतली से किशनगढ़ तक तिरंगा चेतना यात्रा भी निकाली जा चुकी है।
108 गांवों में चलेगा आंदोलन, लाल झंडा अभियान भी होगा
बैठक में आगामी आंदोलन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। इसके तहत—
- 108 गांवों में धरना एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- किशनगढ़ से कोटपूतली तक पांच दिवसीय दोपहिया वाहन जनजागरण रैली निकाली जाएगी।
- प्रभावित किसानों द्वारा अपने-अपने खेतों पर लाल झंडे लगाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
- 108 गांवों के किसान विशाल प्रदर्शन करेंगे।
- संचालन समिति, संघर्ष समिति, सोशल मीडिया समिति, सूचना के अधिकार समिति एवं संसाधन संग्रह समिति का गठन किया जाएगा।
‘परियोजना निरस्त होने तक संघर्ष जारी रहेगा’
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक किसान महापंचायत का आंदोलन लगातार जारी रहेगा। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल भूमि अधिग्रहण का मुद्दा नहीं बल्कि किसानों के अस्तित्व, पर्यावरण और ग्रामीण संस्कृति की रक्षा का संघर्ष है।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट, प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, महामंत्री सुंदरलाल भावरिया, प्रदेश उपाध्यक्ष गोपीराम डबास, प्रदेश मंत्री ज्ञानचंद मीणा, बत्तीलाल बैरवा, मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया, अजमेर जिला अध्यक्ष प्रहलाद खुरड़िया, सीकर जिला अध्यक्ष कैप्टन बलदेव यादव सहित विभिन्न जिलों एवं तहसीलों के पदाधिकारी, सरपंच और किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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