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    भारत के एविएशन सेक्टर का बड़ा विस्तार, 60 नए एयरपोर्ट की तैयारी; जानें सबसे बड़ी बाधा

    नई दिल्ली। भारत का नागरिक उड्डयन (विमानन) क्षेत्र आने वाले समय में एक ऐतिहासिक विस्तार के लिए तैयार है। देश में हवाई यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर नए हवाई अड्डों का जाल बिछाया जा रहा है। भारतीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी 'ब्रिकवर्क रेटिंग्स' की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक देश में 50 से 60 करोड़ यात्रियों की क्षमता विकसित करने और करीब 55 से 60 नए हवाई अड्डे बनाने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की जरूरत होगी।

    आने वाले वर्षों में निवेश की चुनौतियां और स्थिरता

    इतने बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए जरूरी पूंजी जुटाना और नए एयरपोर्ट्स को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाए रखना विमानन क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि, रिपोर्ट में राहत की बात यह कही गई है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक इस सेक्टर का क्रेडिट रेटिंग आउटलुक 'स्थिर' बना रहेगा। हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या, ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स (नए सिरे से बनने वाले एयरपोर्ट) की तेज रफ्तार और प्रमुख एयरपोर्ट ऑपरेटरों पर कम होते कर्ज के कारण यह मजबूती बनी रहेगी। लेकिन, भारी निवेश और निर्माण में लगने वाले लंबे समय के चलते वित्त वर्ष 2021 से 2027 के बीच ऑपरेटरों के शुद्ध मुनाफे में कुछ कमी देखी जा सकती है।

    एविएशन सेक्टर के सामने खड़ी प्रमुख बाधाएं

    विमानन क्षेत्र की इस तेज रफ्तार के रास्ते में कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के भू-राजनीतिक संकट के कारण हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण (जमीन मिलने) में होने वाली देरी, अलग-अलग सरकारी विभागों से मंजूरी मिलने में लगने वाला समय और मेट्रो शहरों के मौजूदा हवाई अड्डों पर क्षमता की कमी जैसी समस्याएं आने वाले वर्षों में बड़ी बाधाएं बन सकती हैं।

    सरकारी नीतियां और डिजिटल पहलों से मिलेगी रफ्तार

    इन चुनौतियों के बावजूद सरकार की नीतियां इस सेक्टर को पूरा समर्थन दे रही हैं। करीब 28,840 करोड़ रुपये के बजट वाली 'उड़ान' (UDAN) योजना, साल 2014 के बाद से 25 नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स को मिली मंजूरी और एयरपोर्ट विकास में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की छूट इस विस्तार को गति दे रही है। साथ ही 'डिजी यात्रा' और 'गगन' जैसी डिजिटल पहलों ने यात्रियों के सफर को बेहद सुगम बना दिया है। फिलहाल नवी मुंबई, पुणे, जेवर (नोएडा), श्रीपेरंबदूर और भिवाड़ी में नए हवाई अड्डों का निर्माण चल रहा है, जबकि दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है।

    साल 2036 तक 48 करोड़ पहुंच जाएगी यात्रियों की संख्या

    पिछले एक दशक में भारत का विमानन क्षेत्र लगभग दोगुना हो चुका है। साल 2014 में जहां देश में सिर्फ 74 चालू हवाई अड्डे थे, वहीं आज इनकी संख्या बढ़कर 163 हो चुकी है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश के हवाई अड्डों से करीब 35.05 करोड़ यात्रियों ने सफर किया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) का अनुमान है कि साल 2030 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हवाई यात्री बाजार बन जाएगा, और साल 2036 तक देश में हवाई यात्रियों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 48 करोड़ तक पहुंच सकती है।

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