मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और उसके उपनगरीय इलाकों में चक्रवाती रफ्तार से चल रही तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के चलते हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। मॉनसून की इस शुरुआती आसमानी आफत के कारण मायानगरी में पेड़ों और उनकी भारी-भरकम शाखाओं के धराशायी होने का एक नया और डरावना रिकॉर्ड बन गया है। महज छह दिनों के भीतर आर्थिक राजधानी में ग्यारह सौ से अधिक पेड़ जड़ से उखड़ चुके हैं, जिसने पिछले तीन वर्षों के पूरे मॉनसून सीजन के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस बेकाबू प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक चार मासूम नागरिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल होकर विभिन्न अस्पतालों में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
चक्रवाती हवाओं के भयंकर वेग ने पेड़ों को किया जमींदोज
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मुंबई में पिछले कुछ दिनों से सामान्य मॉनसूनी हवाओं के विपरीत बहत्तर से अठहत्तर किलोमीटर प्रति घंटे की विनाशकारी रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं। आम तौर पर बारिश के मौसम में हवा की गति महज बीस से तीस किलोमीटर प्रति घंटा ही दर्ज की जाती है, लेकिन इस बार सक्रिय हुए अत्यंत मजबूत वेदर सिस्टम ने हवा की ताकत को तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा है कि इस अप्रत्याशित तूफानी वेग के सामने दशकों पुराने और मजबूत पेड़ भी टिक नहीं पाए और ताश के पत्तों की तरह बिखर गए, जिसके चलते उन्होंने आम जनता से खराब मौसम में केवल आपातकालीन स्थिति में ही घरों से बाहर निकलने का पुरजोर आग्रह किया है।
उपनगरीय इलाकों से लेकर दक्षिण मुंबई तक मची तबाही
बीते चौबीस घंटों के भीतर मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में पांच सौ से अधिक पेड़ गिरने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसने पूरे शहर की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर दिया। आपदा प्रबंधन कक्ष से मिले आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के साथ-साथ दक्षिण मुंबई यानी आइलैंड सिटी के रिहायशी इलाकों में देखने को मिला है। सड़कों, बिजली के तारों और वाहनों पर विशालकाय पेड़ों के गिरने से कई मुख्य मार्गों पर मीलों लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे दफ्तर जाने वाले कामकाजी लोगों और आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पेड़ गिरने की अलग-अलग घटनाओं में गई चार मासूमों की जान
इस बेकाबू आपदा ने शहर के कई परिवारों को कभी न भूलने वाला गम दिया है, जिसमें अलग-अलग हादसों के दौरान चार लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई। मीरा-भायंदर इलाके में चलती मोटरसाइकिल पर अचानक एक भारी नारियल का पेड़ गिरने से पैंतीस वर्षीय राहुल अशोक पाटिल की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि कुर्ला और आरे कॉलोनी में भी पेड़ की टहनियों की चपेट में आने से बुजुर्ग यूनुस कुंडावाला और अठारह वर्षीय युवा हसन रजा ने दम तोड़ दिया। इससे पूर्व चेंबूर इलाके में एक स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिरने से ग्यारह साल के मासूम विहान श्रीवास्तव की जान चली गई थी, वहीं जोगेश्वरी की एक आवासीय इमारत और गोरेगांव में ऑटो रिक्शा पर पेड़ गिरने से दस से अधिक लोग गंभीर रूप से चोटिल हुए हैं।
राहत कार्यों में जुटी बीएमसी ने उद्यानों को किया पूरी तरह बंद
लगातार आ रही आपातकालीन कॉल्स और शिकायतों के कारण बृहन्मुंबई महानगरपालिका के आपदा प्रबंधन और उद्यान विभाग के कर्मचारियों पर काम का भारी दबाव देखा जा रहा है। गिरे हुए भारी तनों को रास्तों से हटाने के लिए उन्हें कटर मशीनों की मदद से शाखा-दर-शाखा काटना पड़ रहा है, जिसमें काफी समय लग रहा है। आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बीएमसी प्रशासन ने शहर के सभी सार्वजनिक पार्कों और उद्यानों को अस्थायी रूप से आम जनता के लिए पूरी तरह बंद करने का बड़ा फैसला लिया है, साथ ही एडवाइजरी जारी कर लोगों को भारी बारिश के दौरान किसी भी पेड़ या कमजोर ढांचे के नीचे शरण न लेने की सख्त हिदायत दी है।


